U-18 Asia Cup 2026: जापान की धरती पर तिरंगे का परचम लहराकर भारतीय अंडर-18 पुरुष और महिला हॉकी टीमें सोमवार को स्वदेश लौट आईं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विजेता खिलाड़ियों का किसी महानायकों की तरह भव्य और जोरदार स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप और भारत माता की जय के नारों के बीच खेल प्रेमियों ने खिलाड़ियों को फूल-मालाओं से लाद दिया। U-18 Asia Cup 2026 में भारतीय जूनियर पुरुष टीम ने जहां मेजबान जापान को हराकर स्वर्ण पदक (Gold Medal) पर कब्जा जमाया, वहीं महिला टीम ने भी शानदार खेल दिखाते हुए कांस्य पदक (Bronze Medal) देश के नाम किया।
U-18 Asia Cup 2026: फाइनल में मेजबान जापान को 4-1 से हराकर भारत बना चैंपियन
काकामिगाहारा में खेले गए टूर्नामेंट के महामुकाबले में भारतीय पुरुष टीम ने एकतरफा खेल दिखाते हुए मेजबान जापान को 4-1 के बड़े अंतर से शिकस्त दी। फाइनल मुकाबले में भारतीय स्टार खिलाड़ी आशीष तानी पूर्ति जीत के सबसे बड़े हीरो साबित हुए, जिन्होंने मैच के दूसरे, 28वें और 34वें मिनट में गोल दागकर अपनी शानदार हैट्रिक पूरी की। इसके साथ ही कप्तान केतन कुशवाहा ने 30वें मिनट में एक बेहतरीन गोल कर टीम की जीत सुनिश्चित कर दी। जापान की ओर से एकमात्र गोल नुमादा गाकु ही कर सके। देश को मिली इस ऐतिहासिक जीत से खेल जगत में उत्साह का माहौल है।
‘अब ओलंपिक में गोल्ड जीतना ही हमारा अगला लक्ष्य’ – कप्तान केतन कुशवाहा
स्वदेश वापसी पर मीडिया से बात करते हुए पुरुष टीम के कप्तान केतन कुशवाहा ने इस बड़ी सफलता का श्रेय पूरी टीम के सामूहिक प्रयास को दिया। कप्तान ने कहा, “हम जापान में एशिया कप जीतकर बेहद खुश हैं। टूर्नामेंट से पहले हमने 40 दिनों का कड़ा अभ्यास कैंप किया था, जिसका फायदा मैदान पर दिखा। जब भी टीम को जरूरत पड़ी, आशीष ने हमारे लिए गोल किए। हम पहले जापान से एक मैच हार चुके थे, इसलिए फाइनल में हम पूरे जोश और बदले के इरादे से उतरे थे। अब हमारा अगला और सबसे बड़ा लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।”
वहीं टीम के मुख्य कोच और पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सरदार सिंह ने टीम की एकता की तारीफ करते हुए कहा, “हमें तैयारी के लिए केवल 1 से 2 महीने का ही समय मिला था, लेकिन टीम ने उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया। समय की कमी को देखते हुए हमने टीम बॉन्डिंग और अंतरराष्ट्रीय मैचों की बारीकियों पर फोकस किया, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।”
बेटियों ने भी मनवाया लोहा, दक्षिण कोरिया को 3-0 से हराकर जीता ब्रॉन्ज
दूसरी ओर, भारतीय अंडर-18 महिला हॉकी टीम ने भी टूर्नामेंट में अपनी आक्रामक शैली और मजबूत डिफेंस से सबका दिल जीत लिया। सेमीफाइनल की कसक को पीछे छोड़ते हुए भारतीय बेटियों ने ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में दक्षिण कोरिया को 3-0 से करारी शिकस्त देकर पोडियम फिनिश हासिल की। भारत के लिए संदीपा कुमारी, कप्तान स्वीटी कुजूर और नुशीन नाज़ ने शानदार गोल दागे। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय महिला टीम ने विरोधी टीमों के खिलाफ रिकॉर्ड 36 गोल दागे, जो उनके बेहतरीन खेल को दर्शाता है।
महिला टीम की मुख्य कोच रानी रामपाल ने खिलाड़ियों की पीठ थपथपाते हुए कहा, “ईमानदारी से कहूं तो हम गोल्ड की उम्मीद से गए थे, लेकिन इन युवा लड़कियों के लिए सेमीफाइनल का दबाव झेलने का यह पहला अनुभव था। पहली बार में ही पोडियम तक पहुंचना भविष्य के लिए बड़ा बूस्ट है। इन बच्चों में अपार क्षमता है, और यही खिलाड़ी 2032 और 2036 के ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।” कोच रानी रामपाल ने पूरे टूर्नामेंट में 12 गोल दागने वाली स्ट्राइकर नुशीन नाज़ की जमकर तारीफ की और उनके भविष्य को बेहद उज्ज्वल बताया।
हॉकी इंडिया के खिलाड़ियों और स्टाफ को मिले कई इनाम
खिलाड़ियों के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन और देश का गौरव बढ़ाने के लिए हॉकी इंडिया ने नकद पुरस्कारों की बौछार कर दी है। देश में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने की नीति के तहत हॉकी इंडिया ने स्वर्ण पदक विजेता पुरुष टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को 3 लाख रुपये और सपोर्ट स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को 1.5 लाख रुपये देने की घोषणा की है। इसके साथ ही, कांस्य पदक जीतने वाली महिला टीम की प्रत्येक खिलाड़ी को 1 लाख रुपये और उनके सपोर्ट स्टाफ को 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि से नवाजा जाएगा। सरकार और खेल महासंघ के इस प्रोत्साहन से युवा खिलाड़ियों के हौसले बुलंद हैं।
