Sambhal में गरजा प्रशासन का बुलडोजर, कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध रूप से बनी मुस्तफा कादरी मस्जिद ध्वस्त | DD News UP

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Sambhal: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख एक बार फिर देखने को मिला है। जिले के नखासा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कसेरुआ में शनिवार को उस वक्त भारी हलचल मच गई, जब प्रशासन की टीम लाव-लश्कर और बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंची। नखासा थाना क्षेत्र में कब्रिस्तान की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित मुस्तफा कादरी मस्जिद को शनिवार को प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोजर चलाकर पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े और सुरक्षा चाक-चौबंद रहे, इसके लिए गांव में 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए नगर पंचायत सिरसी से चार बुलडोजर, डंपर और ट्रैक्टरों के साथ ही 20 सफाईकर्मियों की टीम को मौके पर लगाया गया था।

तहसीलदार कोर्ट के आदेश के बाद हुई बेदखली, ग्रामीणों की शिकायत पर राजस्व विभाग ने की थी जांच

प्रशासन द्वारा की गई यह बड़ी बुलडोजर कार्रवाई कानूनी प्रक्रियाओं के पालन के बाद अमल में लाई गई है। दरअसल, ग्राम कसेरुआ के स्थानीय निवासियों ने कब्रिस्तान की भूमि को सुरक्षित कराने और उस पर हो रहे अवैध कब्जे को रोकने के लिए जिला प्रशासन से लिखित शिकायत की थी। ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर जब राजस्व विभाग की टीम ने मामले की गहन जांच की, तो पाया गया कि लगभग 120 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण कर अवैध रूप से कब्जा किया गया था। जमीन के सरकारी होने की पुष्टि होने के बाद, प्रशासन ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।

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 मज्जिद कमेटी नहीं पेश कर सकी कोई वैध साक्ष्य, 21 अप्रैल को कोर्ट ने सुनाया था फैसला

राजस्व कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी को अपना पक्ष और मालिकाना हक साबित करने के लिए प्रशासन द्वारा पूरा मौका और पर्याप्त समय दिया गया था। तहसीलदार कोर्ट के मुताबिक, लंबी चली सुनवाई के बाद भी मस्जिद कमेटी की ओर से ऐसा कोई भी वैध दस्तावेज, सरकारी कागज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिससे यह साबित हो सके कि मस्जिद का निर्माण किसी निजी या वैध भूमि पर किया गया है। इसके बाद, साक्ष्यों के अभाव और अवैध कब्जे की पुष्टि होने पर तहसीलदार कोर्ट ने गत 21 अप्रैल को मस्जिद कमेटी के खिलाफ बेदखली का अंतिम आदेश पारित कर दिया था। कोर्ट के इसी आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए शनिवार को प्रशासनिक अमले ने मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

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मस्जिद परिसर से मिले कुछ पोस्टर और झंडे, Sambhal पुलिस और उच्चाधिकारी जांच में जुटे

ध्वस्तीकरण और अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई से ठीक पहले, जब प्रशासनिक और पुलिस टीम ने एहतियातन मस्जिद परिसर के भीतर गहन जांच-पड़ताल की, तो वहां से कुछ सामग्री बरामद हुई। जांच के दौरान मस्जिद की पहली मंजिल से “आई लव मोहम्मद” लिखे कुछ पोस्टर और एक हरे रंग का झंडा मिला है, जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस प्रशासन अब इस बात की गहराई से तफ्तीश करने में जुटा है कि ये पोस्टर किन लोगों द्वारा छपवाए गए थे और इसके पीछे की मंशा क्या थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संभल के जिलाधिकारी (DM) अंकित खंडेलवाल और क्षेत्राधिकारी (CO) कुलदीप कुमार ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। वहीं, पुलिस अधीक्षक (SP) केके बिश्नोई ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था पूरी तरह कायम है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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