Nepal: भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के विशेष निमंत्रण पर शुक्रवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे नेपाली विदेश मंत्री का भारतीय अधिकारियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। यह यात्रा दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है और इसे दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय परिदृश्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस तीन दिवसीय दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिसका मुख्य केंद्र आपसी विश्वास और सहयोग को आगे बढ़ाना है।
India-Nepal Relations: डॉ. एस जयशंकर के साथ होगी औपचारिक बैठक
नेपाली विदेश मंत्री के इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ होने वाली औपचारिक बैठक है। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों नेता भारत और नेपाल के आपसी हितों से जुड़े कई सामरिक और कूटनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत का प्राथमिक उद्देश्य मौजूदा द्विपक्षीय साझेदारी की समीक्षा करना और उन नए क्षेत्रों की पहचान करना है जहाँ दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं। यह बैठक एक ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ (Neighborhood First) नीति के तहत नेपाल के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है। बैठक के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी सहयोग जैसे विषयों पर भी बातचीत होने की प्रबल संभावना है।
व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी पर रहेगा विशेष फोकस
भारत और नेपाल के बीच होने वाली इस वार्ता में आर्थिक सहयोग एक मुख्य स्तंभ के रूप में उभर कर सामने आएगा। चर्चा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश और सीमा पार कनेक्टिविटी (Cross-border Connectivity) को और अधिक सुगम बनाना है। दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को कम करने और भारतीय निवेशकों को नेपाल में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। इसके अलावा, सीमा पार परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए चल रही रेलवे और सड़क परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी, जिससे न केवल माल की आवाजाही आसान होगी बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
ऊर्जा सहयोग और जलविद्युत परियोजनाओं पर होगी चर्चा
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भारत और नेपाल के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। बैठक के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और ज्यादा गहरा करने पर गहन विचार-विमर्श होगा, जिसमें नेपाल की जलविद्युत क्षमता का लाभ उठाकर भारत को स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति और नेपाल के आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दोनों नेताओं के बीच पूर्व में हुए बिजली व्यापार समझौतों के क्रियान्वयन और नई पनबिजली परियोजनाओं के विकास को लेकर रोडमैप तैयार किए जाने की उम्मीद है। यह सहयोग न केवल दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक ढांचे को मजबूती प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा।
‘पीपल टू पीपल कांटेक्ट’ को बढ़ावा देने पर जोर
आर्थिक और सामरिक मुद्दों के साथ-साथ, दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों यानी ‘पीपल टू पीपल कांटेक्ट’ (People-to-People Contact) को और अधिक प्रगाढ़ बनाना इस यात्रा का एक प्रमुख एजेंडा है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा और साझा सांस्कृतिक व धार्मिक विरासत को देखते हुए, पर्यटन और शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर चर्चा की जाएगी। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक ‘रोटी-बेटी’ के संबंध को और अधिक जीवंत बनाने के लिए सांस्कृतिक उत्सवों और आपसी यात्राओं को सुगम बनाने पर जोर दिया जाएगा। यात्रा के अंत में यह उम्मीद की जा रही है कि इस द्विपक्षीय विमर्श से भारत और नेपाल के मैत्रीपूर्ण संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचार होगा और भविष्य की साझेदारी के लिए एक ठोस आधार तैयार होगा।
