Amarnath Yatra: 1 जुलाई से ‘नो फ्लाइंग जोन’ घोषित हुए अमरनाथ यात्रा के सभी रूट, हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद | DD News UP

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Amarnath Yatra: दक्षिण कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा की वार्षिक तीर्थयात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और बाधा मुक्त बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक बेहद बड़ा और कड़ा सुरक्षात्मक कदम उठाया है. उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाले प्रशासन ने बुधवार को अमरनाथ यात्रा के सभी पारंपरिक और निर्धारित मार्गों को आगामी 1 जुलाई से पूरी तरह से ‘नो फ्लाइंग जोन’ (उड़ान निषिद्ध क्षेत्र) घोषित कर दिया है. गृह विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सरकारी आदेश संख्या 321-होम ऑफ 2026 के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी ने पहलगाम और बालटाल दोनों अक्षों (Axes) सहित अमरनाथ यात्रा के सभी मार्गों को 1 जुलाई से यात्रा के विधिवत समापन तक ‘नो फ्लाइंग जोन’ के रूप में अधिसूचित किया है. प्रशासन का यह रणनीतिक निर्णय पूरी यात्रा अवधि के दौरान हवाई सुरक्षा को अचूक और अभेद्य बनाने के उद्देश्य से लिया गया है.

हेलीकॉप्टर सेवाओं के निलंबन से बदला सफर का तरीका, पैदल या खच्चर-पालकी से ही पहुंचेंगे श्रद्धालु

इस नए और कड़े सुरक्षा प्रतिबंध के लागू होने के परिणामस्वरूप, इस वर्ष पवित्र अमरनाथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों को मिलने वाली पारंपरिक हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकेंगी. सरकार द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर स्पष्ट किया गया है कि हवाई प्रतिबंधों के कारण इस बार श्रद्धालु हवाई मार्ग का उपयोग नहीं कर पाएंगे. ऐसे में देश-विदेश से आने वाले सभी शिवभक्तों को पवित्र गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए पूरी यात्रा के दौरान केवल पैदल मार्ग का सहारा लेना होगा, या फिर वे सुरक्षा घेरे के बीच स्थानीय स्तर पर उपलब्ध टट्टू (ponies) और पालकी (palanquins) की सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे. प्रशासन का मानना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए जमीनी सुरक्षा इंतजामों को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है.

3 जुलाई से शुरू होगी 57 दिवसीय Amarnath Yatra, अब तक 3.6 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

दक्षिण कश्मीर के सुदूर हिमालयी पर्वतों के बीच स्थित इस पवित्र गुफा मंदिर की 57 दिनों तक चलने वाली वार्षिक तीर्थयात्रा का विधिवत शुभारंभ आगामी 3 जुलाई से होने जा रहा है. बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए देश भर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 3.6 लाख से अधिक यात्री इस पवित्र यात्रा के लिए अपना अग्रिम पंजीकरण (Registration) करा चुके हैं. दरअसल, अमरनाथ यात्रा हमेशा से ही पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों के निशाने पर रही है, जिसके कारण सुरक्षा एजेंसियां इस बार किसी भी स्तर पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती हैं. पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसेरन पर्यटक स्थल पर पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किए गए एक कायरतापूर्ण हमले में कम से कम 25 हिंदू पर्यटकों की जान चली गई थी, जिसके कारण साल 2025 में श्रद्धालुओं की संख्या प्रभावित हुई थी और केवल 4,14,311 तीर्थयात्री ही पवित्र गुफा के दर्शन कर पाए थे. इसी इतिहास को देखते हुए इस बार सुरक्षा के ऐसे अभूतपूर्व इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रीतिकर घटना को पूरी तरह से रोका जा सके.

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सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की 670 कंपनियां तैनात, पिछले साल के मुकाबले बढ़ाई गई सैन्य ताकत

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य चक्रव्यूह में बदलने के लिए अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की कुल 670 कंपनियों को तैनात किया गया है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 89 कंपनियां अधिक हैं. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों के दस्ते जम्मू पहुंचना शुरू हो चुके हैं. सुरक्षा योजना के मुताबिक, सीआरपीएफ (CRPF) के अत्यधिक प्रशिक्षित और अत्याधुनिक हथियारों से लैस सशस्त्र कमांडो हर सुबह यात्री निवास से बालटाल और पहलगाम के लिए रवाना होने वाले तीर्थयात्रियों के काफिले (Convoys) को अपनी कड़ी निगरानी में एस्कॉर्ट करेंगे.

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रहेगा 24 घंटे कड़ा पहरा, वंदे भारत ट्रेनों के रेल ट्रैक की भी होगी निगरानी

सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए लगभग 250 किलोमीटर लंबे संवेदनशील जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 44) पर सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा चौबीसों घंटे (24×7) कड़ी गश्त और डोमिनेशन सुनिश्चित किया जाएगा. जम्मू से प्रस्थान करने वाले श्रद्धालुओं के काफिले को आगे बढ़ने की अनुमति केवल तभी दी जाएगी, जब सेना और सीआरपीएफ की रोड ओपनिंग पार्टियां (ROP) पूरे हाईवे की गहन जांच (Sanitization) कर पूरी तरह सुरक्षित होने का ग्रीन सिग्नल दे देंगी. इसके साथ ही, इस वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के वंदे भारत ट्रेनों के माध्यम से सीधे श्रीनगर तक यात्रा करने की उम्मीद को देखते हुए जम्मू-श्रीनगर रेल ट्रैक और उसके रूट में आने वाले सभी रेलवे स्टेशनों पर भी सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया गया है. रेल पटरियों से लेकर प्लेटफार्मों की कड़ी निगरानी की जिम्मेदारी सुरक्षा बलों और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को सौंपी गई है ताकि बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आने वाले हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की जा सके.

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