Flex-fuel: भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र और पर्यावरण-अनुकूल गतिशीलता (Alternative-Fuel Mobility) के इतिहास में आज एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित होने जा रहा है। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) आज विश्व पर्यावरण दिवस से ठीक पहले भारत की पहली मास-मार्केट फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर गाड़ी का आधिकारिक तौर पर अनावरण करने के लिए पूरी तरह तैयार है। दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘ताज पैलेस’ में आयोजित होने वाले इस भव्य और बहुप्रतीक्षित लॉन्चिंग इवेंट में देश के केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी मुख्य अतिथि के रूप में विशेष रूप से शामिल होंगे। मारुति सुजुकी की यह नई प्रस्तुति न केवल देश के ऑटोमोबाइल उद्योग को एक नई दिशा देगी, बल्कि हरित और प्रदूषण मुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों को भी बड़ी मजबूती प्रदान करेगी।
E20 से लेकर E100 इथेनॉल मिश्रण पर दौड़ेगी देश की पहली कार
यह अपकमिंग मॉडल भारत का पहला ऐसा पैसेंजर वाहन बनने जा रहा है, जो E20 से लेकर E100 तक के इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण (जिसमें 100 प्रतिशत शुद्ध इथेनॉल भी शामिल है) पर बेहद सुगमता से चलने में पूरी तरह सक्षम होगा। इस क्रांतिकारी गाड़ी का बाजार में आना इसलिए भी संभव हो सका है क्योंकि हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने E100-अनुकूल (E100-compatible) वाहनों को हरी झंडी देने के लिए देश के वाहन परीक्षण और प्रमाणन मानदंडों (Vehicle Testing and Certification Norms) में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। सरकार के इस दूरगामी नीतिगत बदलाव ने अब देश के सभी प्रमुख वाहन निर्माताओं के लिए भारतीय बाजार में उच्च-इथेनॉल अनुकूल उत्पादों को उतारने का रास्ता पूरी तरह से साफ कर दिया है।
वैगनआर या फ्रॉन्क्स के Flex-fuel मॉडल पर टिकीं सबकी निगाहें
हालांकि, मारुति सुजुकी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अनावरण होने वाली इस विशिष्ट गाड़ी के नाम और मॉडल की पहचान का खुलासा नहीं किया है, लेकिन ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार कंपनी आज अपनी ‘वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल’ (WagonR Flex Fuel) या ‘फ्रॉन्क्स फ्लेक्स फ्यूल’ (Fronx Flex Fuel) में से किसी एक मॉडल से पर्दा उठा सकती है। गौरतलब है कि मारुति सुजुकी ने ‘भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2024’ में अपनी वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल के प्रोटोटाइप को प्रदर्शित किया था, जिसे विशेष रूप से E20 और E85 के बीच के इथेनॉल मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन किया गया था। दूसरी ओर सुजुकी ने ‘जापान मोबिलिटी शो 2025’ में अपनी प्रीमियम कार फ्रॉन्क्स (Fronx) के एक फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण को दुनिया के सामने पेश किया था, जो इथेनॉल-अनुकूल तकनीकों के प्रति कंपनी की वैश्विक प्रतिबद्धता को साफ तौर पर दर्शाता है।
ईंधन आयात बिल में आएगी भारी कमी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बूस्ट, जानिए क्या है Flex-fuel तकनीक
इस गाड़ी की लॉन्चिंग को भारत के आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के आयात पर देश की निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, वर्तमान में भारत की पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस की कुल आवश्यकताओं का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात के जरिए पूरा किया जाता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर उत्पादित बायोफ्यूल जैसे इथेनॉल का उपयोग बढ़ने से देश के भारी-भरकम ईंधन आयात बिल में कमी आएगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। इसके अतिरिक्त, सरकार इथेनॉल उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध करने और किसानों की आय बढ़ाने के एक बड़े साधन के रूप में देख रही है, क्योंकि इसके निर्माण के लिए गन्ने और अनाज आधारित कृषि कच्चे माल की मांग में भारी वृद्धि होगी।
इंजन और फ्यूल सिस्टम में किए गए हैं कई महत्वपूर्ण बदलाव
एक सामान्य पेट्रोल कार की तुलना में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन को काफी अलग और एडवांस तरीके से तैयार किया जाता है। चूंकि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में अधिक संक्षारक (Corrosive) होता है और नमी को बहुत तेजी से सोखता है, इसलिए इस गाड़ी के ईंधन पाइप, इंजेक्टर, सील और इंजन-प्रबंधन प्रणालियों (Engine-Management Systems) को विशेष रूप से अपग्रेड किया गया है ताकि वे उच्च इथेनॉल सांद्रता को आसानी से संभाल सकें। हालांकि, वर्तमान में भारत में केवल E20 स्तर का पेट्रोल ही व्यापक रूप से उपलब्ध है और E85 व E100 जैसे उच्च-इथेनॉल ईंधन की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके बावजूद मारुति सुजुकी की यह पहल भारतीय ऑटो उद्योग के लिए एक उत्प्रेरक (Catalyst) का काम करेगी, क्योंकि टाटा मोटर्स (Tata Motors) जैसी कई अन्य दिग्गज कंपनियां भी अब फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं और आने वाले समय में यह तकनीक पारंपरिक पेट्रोल इंजनों और भविष्य के शून्य-उत्सर्जन (Zero-Emission) वाहनों के बीच एक बेहद मजबूत पुल के रूप में स्थापित होने जा रही है।
