Gorakhpur की नई पहचान: कचरे के ढेर से बना शानदार ईको पार्क और विकास की नई उड़ान, 497 परियोजना का लोकार्पण-शिलान्यास

Gorakhpur

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Gorakhpur : आज हम बात करेंगे उस शहर की, जिसकी तस्वीर पिछले कुछ सालों में इतनी बदल गई है कि पहचानना मुश्किल हो जाता है। जी हां, बात हो रही है Gorakhpur की। अक्सर कहा जाता है कि अगर आपकी नीयत साफ हो, तो आप अपनी किस्मत खुद लिख सकते हैं। यही बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर में एक बड़े कार्यक्रम के दौरान कही।

Gorakhpur के विकास का सफर अब एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है। यहाँ न सिर्फ सड़कों का जाल बिछ रहा है, बल्कि पर्यावरण को लेकर भी एक ऐसी मिसाल पेश की गई है, जिसे देखकर दूसरे शहर भी प्रेरणा ले सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि गोरखपुर में इस बार क्या-क्या नया हुआ है और कैसे एक ‘बदबूदार कचरे का ढेर’ अब शहर का ‘पिकनिक स्पॉट’ बन गया है।

नीयत साफ हो तो नियति बदलती है

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी Gorakhpur आते हैं, उनके पास शहर के लिए कुछ न कुछ नया होता है। इस बार उन्होंने राप्ती नदी के एकला बंधे पर करीब 1055 करोड़ रुपये की लागत वाली 497 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

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मंच से जनता को संबोधित करते हुए सीएम ने एक बहुत ही गहरी बात कही। उन्होंने कहा, “जब नीयत साफ हो तो नियति बदलने में देर नहीं लगती।” इसका सीधा मतलब यह है कि अगर सरकार की काम करने की इच्छाशक्ति पक्की हो, तो सालों पुरानी समस्याएं भी चुटकियों में हल हो सकती हैं। Gorakhpur में पिछले नौ वर्षों में जो बदलाव आया है, वह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है। एक समय था जब Gorakhpur की पहचान पिछड़ेपन और गंदगी से होती थी, लेकिन आज यह विकास का मॉडल बन चुका है।

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कचरे से कंचन: एकला बंधे का कायाकल्प

Gorakhpur शहर में घुसते ही पहले क्या दिखता था? वाराणसी या लखनऊ की तरफ से आने वाले लोगों का स्वागत कचरे के ऊंचे पहाड़ों और उससे आने वाली बदबू से होता था। यह नजारा न सिर्फ भद्दा लगता था, बल्कि शहर की छवि भी खराब करता था। लेकिन अब वहां की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

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नगर निगम ने लिगेसी वेस्ट का निस्तारण करके उस डंपिंग ग्राउंड को एक खूबसूरत ईको पार्क में तब्दील कर दिया है। करीब 2.26 लाख मीट्रिक टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से हटाया गया और वहां हरियाली बिछाई गई। सीएम ने इसे ‘कचरे से कंचन’ बनाने का अभियान बताया। अब यह जगह बच्चों के लिए खेल का मैदान, बड़ों के लिए योग केंद्र और परिवारों के लिए एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट बन गई है।

नौसढ़-मलौनी फोरलेन सड़क: जाम से मिलेगी मुक्ति

Gorakhpur आने-जाने वालों के लिए नौसढ़ का इलाका हमेशा से जाम का सिरदर्द रहा है। मुख्यमंत्री ने इस समस्या का समाधान करते हुए नौसढ़-मलौनी फोरलेन सड़क का लोकार्पण किया। लगभग तीन किलोमीटर लंबी यह सड़क लखनऊ और वाराणसी की तरफ से आने वाले ट्रैफिक को सुगम बनाएगी।

सिर्फ सड़कें ही नहीं, शहर के अंदर की गलियों और मुख्य मार्गों को भी सीएम ग्रिड योजना के तहत स्मार्ट बनाया जा रहा है। इसमें बेतियाहाता, कचहरी चौक और विश्वविद्यालय रोड जैसी सड़कों का कायाकल्प शामिल है। अब सड़कों पर सिर्फ डामर नहीं होगा, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और आधुनिक स्ट्रीट लाइट्स भी होंगी।

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स्वच्छ स्कूल अभियान और बच्चों की भूमिका

स्वच्छता सिर्फ सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक आदत है। इसी सोच के साथ सीएम योगी ने स्वच्छ स्कूल अभियान का शुभारंभ किया। इसके तहत गोरखपुर को ‘7 स्टार गार्बेज फ्री सिटी‘ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें स्कूली बच्चों को जोड़ा जा रहा है। बच्चों को RRR (Reduce, Reuse, Recycle) का मंत्र सिखाया जा रहा है। जब बच्चे अपने घर में सफाई की बात करेंगे, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा। वेस्ट टू आर्ट और रील मेकिंग जैसी प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं को इस मुहिम से जोड़कर इसे एक जन आंदोलन बनाने की तैयारी है।

Gorakhpur में हुआ हर क्षेत्र में बदलाव

अगर हम पिछले कुछ सालों पर नजर डालें, तो गोरखपुर ने हर सेक्टर में छलांग लगाई है। चाहे वो स्वास्थ्य हो, शिक्षा हो या फिर उद्योग।

  • स्वास्थ्य: एम्स (AIIMS) और बीआरडी मेडिकल कॉलेज अब पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र बन चुके हैं।

  • शिक्षा: शहर में अब चार विश्वविद्यालय हैं, जो युवाओं को बेहतर भविष्य दे रहे हैं।

  • उद्योग: बंद पड़ा खाद कारखाना (Fertilizer Plant) फिर से चालू हो गया है और पिपराइच की चीनी मिल किसानों की खुशहाली का जरिया बन रही है।

  • खेल: खेल प्रेमियों के लिए मिनी स्टेडियम के साथ-साथ अब एक इंटरनेशनल स्टेडियम का निर्माण भी शुरू हो गया है।

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पर्यावरण और सोलर एनर्जी पर जोर

आज के समय में प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एकला तटबंध पर जो भी बिजली इस्तेमाल होगी, वह सोलर एनर्जी से आएगी। इसके लिए वहां सोलर पैनल लगाए गए हैं। यह कदम ‘नेट जीरो’ के लक्ष्य को पाने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही, वहां लगाया गया ‘सिटी फॉरेस्ट’ प्रदूषण को कम करने और हरियाली बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। सीएम ने सभी पार्षदों और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपने-अपने वार्ड में मिनी फॉरेस्ट विकसित करें।

सेफ और स्मार्ट सिटी का विजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि हमारे शहर न सिर्फ स्मार्ट हों, बल्कि सुरक्षित भी हों। उत्तर प्रदेश के सभी नगर निगम अब इसी दिशा में एक-दूसरे से मुकाबला कर रहे हैं। Gorakhpur में अब जल निकासी के लिए पक्के नाले बनाए जा रहे हैं, अंधेरी गलियों में एलईडी लाइट्स लग गई हैं और लोगों को शुद्ध पीने का पानी मिल रहा है। ‘सेफ सिटी’ प्रोजेक्ट के तहत तकनीक का इस्तेमाल कर सुरक्षा व्यवस्था को भी चाक-चौबंद किया जा रहा है।

Gorakhpur का यह बदलाव रातों-रात नहीं आया है। इसके पीछे सही नीयत, कड़ी मेहनत और जनता का सहयोग है। कचरे के ढेर को ईको पार्क में बदलना यह बताता है कि अगर हम ठान लें, तो अपनी समस्याओं को ही समाधान में बदल सकते हैं। 1055 करोड़ की ये परियोजनाएं गोरखपुर के भविष्य को और भी चमकदार बनाएंगी। अब जिम्मेदारी हमारी और आपकी है कि हम अपने शहर की इस सुंदरता और स्वच्छता को बनाए रखें।

उम्मीद है कि गोरखपुर की यह विकास यात्रा ऐसे ही जारी रहेगी और यह शहर पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा।

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