वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय में शनिवार का दिन उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए राज्यव्यापी School Chalo Abhiyan का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने न केवल नवाचार पुस्तिका का विमोचन किया, बल्कि स्वयं अपने हाथों से परिषदीय स्कूल की छात्राओं को भोजन परोसा। उन्होंने बच्चों के बीच बैठकर उनसे बातचीत की और उन्हें प्रतिदिन स्कूल आने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री का यह सहज अंदाज बच्चों के लिए किसी बड़े प्रोत्साहन से कम नहीं था।
शिक्षा का असली उद्देश्य: सर्टिफिकेट नहीं, मनुष्यता
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा की वास्तविक परिभाषा को रेखांकित किया। उन्होंने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि कैसे एक स्कूल में बच्चों की कम संख्या पर प्रधानाध्यापक ने बच्चों की ‘अरुचि’ का बहाना बनाया था। सीएम योगी ने कड़े शब्दों में कहा कि बच्चों में जिज्ञासा जगाना और उन्हें पढ़ाई के प्रति आकर्षित करना शिक्षकों का परम दायित्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा केवल सर्टिफिकेट या डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को एक बेहतर इंसान बनाने का सबसे सशक्त जरिया है। School Chalo Abhiyan का मूल उद्देश्य भी यही है कि कोई भी बच्चा शिक्षा के इस प्रकाश से वंचित न रहे।
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‘ऑपरेशन कायाकल्प’ से बदली स्कूलों की सूरत
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद से ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर खड़ा करने का जो प्रयास शुरू हुआ था, उसके परिणाम आज सबके सामने हैं। स्कूलों में अब मूलभूत सुविधाएं, बेहतर फर्नीचर और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध है। School Chalo Abhiyan ने नामांकन के पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और ड्रॉपआउट दर में भारी कमी आई है। पिछली सरकारों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पहले की व्यवस्था और आज की सक्रियता में जमीन-आसमान का अंतर है।
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अधिकारियों के लिए मिसाल: चित्रकूट डीएम की प्रशंसा
शिक्षा के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने चित्रकूट के जिलाधिकारी की विशेष रूप से तारीफ की। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने अपने बच्चे का दाखिला एक सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों और शिक्षकों को सलाह दी कि वे भी इस पहल को अपनाएं। उन्होंने कहा कि जब समाज के जिम्मेदार लोग सरकारी स्कूलों पर भरोसा दिखाएंगे, तो इन संस्थानों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार होगा। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने कक्षा 1 से 8 तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को बैग, पाठ्यपुस्तकें और अन्य शिक्षण सामग्री वितरित की।

निपुण भारत में यूपी नंबर वन और कस्तूरबा विद्यालयों का विस्तार
इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने School Chalo Abhiyan के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह अभियान 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने का संकल्प है। मंत्री ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश आज ‘निपुण भारत अभियान’ के तहत पूरे देश में पहले स्थान पर है।
बालिकाओं की शिक्षा को और मजबूत करने के लिए प्रदेश के 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 8 से बढ़ाकर कक्षा 12 तक उन्नत किया जा रहा है। जिन ब्लॉकों में ये विद्यालय नहीं हैं, वहां नए स्कूल स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, ‘बाल वाटिका’ के जरिए 3 से 6 वर्ष के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने की शुरुआत भी प्रभावी रूप से की जा रही है।
नवाचार का केंद्र: अटल टिंकरिंग लैब
कार्यक्रम का एक अन्य आकर्षण पीएम श्री राजकीय क्वींस कॉलेज के छात्रों द्वारा लगाई गई ‘अटल टिंकरिंग लैब’ की प्रदर्शनी रही। मुख्यमंत्री ने छात्र गणेश मौर्य और नीतीश मिश्र से लैब के कामकाज के बारे में विस्तृत जानकारी ली। छात्रों ने जब अपने द्वारा बनाए गए रोबोट और वैज्ञानिक मॉडल सीएम को दिखाए, तो उन्होंने खुशी जाहिर की। छात्रों ने बताया कि School Chalo Abhiyan के तहत मिलने वाले इन तकनीकी संसाधनों की वजह से वे अब केवल रटते नहीं हैं, बल्कि नवाचार (Innovation) कर पा रहे हैं। गौरतलब है कि गणेश मौर्य ने राज्य स्तरीय ‘इनोवेटिव उत्तर प्रदेश’ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर का जीवंत प्रमाण है।
मेधावी विद्यालयों और छात्रों का सम्मान
मुख्यमंत्री ने जनपद के पांच उत्कृष्ट “निपुण विद्यालयों” (नयापुर, सगुनाहा, फरीदपुर, भसार और महमूरगंज) के प्रधानाध्यापकों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। इसके साथ ही, पांच मेधावी “निपुण विद्यार्थियों” (अभय, जानवी, श्रेयांश, नैंसी और सरस्वती) को भी पुरस्कृत किया गया। यह सम्मान न केवल उन स्कूलों के लिए था, बल्कि पूरे प्रदेश के शिक्षा जगत के लिए एक प्रेरणा था।
वाराणसी से शुरू हुआ यह School Chalo Abhiyan उत्तर प्रदेश को ‘शिक्षा का हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री की सीधी भागीदारी और नवाचार पर जोर यह सुनिश्चित करता है कि आने वाला समय प्रदेश के बच्चों के लिए स्वर्णिम होगा। जब हर बच्चा स्कूल पहुंचेगा और हर शिक्षक अपनी पूरी ऊर्जा से पढ़ाएगा, तभी ‘निपुण प्रदेश’ का सपना हकीकत में बदलेगा।
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