मिडिल ईस्ट में महायुद्ध का आगाज़: ईरान ने इज़राइल पर दागीं ‘खैबर’ मिसाइलें, जवाब में IDF ने तेहरान में घुसकर इंटेलिजेंस चीफ को मार गिराया

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तेहरान/तेल अवीव: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब एक ऐसे मोड़ पर दस्तक दे दी है, जहाँ से वापसी की राह नज़र नहीं आ रही। सोमवार को इस्लामिक रेवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर “ट्रू प्रॉमिस 4 ऑपरेशन की दसवीं लहर” शुरू करने की घोषणा कर दी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम न्यूज़’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने तेल अवीव स्थित सरकारी कॉम्प्लेक्स और पूर्वी अल-कुद्स (यरूशलेम) में रणनीतिक ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है।

IRGC के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी नौवें आधिकारिक बयान में बताया गया कि इस हमले के दौरान ईरान की सबसे घातक “खैबर मिसाइलों” का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है। ईरानी कमांडरों का दावा है कि इन मिसाइल हमलों ने इज़राइल के कब्जे वाले इलाकों में “आग के दरवाज़े” खोल दिए हैं। यह हमला ईरान की ओर से अब तक के सबसे भीषण हवाई अभियानों में से एक माना जा रहा है। हमले के साथ ही ईरान ने इज़राइल में रहने वाले नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे तुरंत सैन्य ठिकानों, सुरक्षा केंद्रों और सरकारी इमारतों के आसपास के इलाकों को खाली कर दें।

इज़राइल में सायरन की गूंज: हाइफ़ा और तेल अवीव दहले

ईरान की ओर से जारी धमकियों में कहा गया है कि इज़राइल में अब सायरन की आवाज़ें कभी बंद नहीं होंगी। तस्नीम न्यूज़ के मुताबिक, मिसाइलों की ताज़ा लहर में विशेष रूप से तेल अवीव के प्रशासनिक हब और हाइफ़ा के उच्च-सुरक्षा वाले सैन्य ठिकानों को प्राथमिकता दी गई है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने इज़राइली नागरिकों से कहा है कि वे अपनी जान बचाने के लिए प्रशासनिक इमारतों से दूर रहें, क्योंकि ईरान का उद्देश्य इज़राइल के शासन तंत्र को पंगु बनाना है।

इस हमले के बाद इज़राइल के कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इस बार अपनी मिसाइल तकनीक में बदलाव किया है ताकि इज़राइल के ‘आयरन डोम’ और ‘एरो’ डिफेंस सिस्टम को चकमा दिया जा सके। यरूशलेम के आसमान में मिसाइलों और इंटरसेप्टर के बीच हुई भिड़ंत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जो इस युद्ध की भयावहता को दर्शाती हैं।

इज़राइल का पलटवार: ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन’ में ईरानी इंटेलिजेंस के दिग्गज ढेर

ईरानी मिसाइलों के जवाब में इज़राइल डिफेंस फोर्सेज़ (IDF) ने बिजली की रफ्तार से जवाबी कार्रवाई की। इज़राइल ने इस मिशन को ‘रोरिंग लायन’ (दहाड़ता शेर) नाम दिया है। सोमवार को इज़राइली सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने तेहरान के भीतर घुसकर ईरानी इंटेलिजेंस मंत्रालय के शीर्ष सदस्यों को खत्म कर दिया है। यह इज़राइल की ओर से ईरान के नेतृत्व पर किया गया अब तक का सबसे सटीक और बड़ा हमला माना जा रहा है।

IDF की रिपोर्ट के अनुसार, मारे गए अधिकारियों में सैयद याह्या हमीदी शामिल हैं, जो ईरान के “इज़राइल मामलों के डिप्टी इंटेलिजेंस मिनिस्टर” थे। हमीदी की पहचान एक ऐसे मास्टरमाइंड के रूप में थी जो विदेशों में यहूदियों और पश्चिमी देशों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों का संचालन करता था। इसके साथ ही इज़राइल ने ईरानी “जासूसी डिवीजन के प्रमुख” जलाल पोर हुसैन की मौत की भी पुष्टि की है। इज़राइली वायुसेना (IAF) ने तेहरान स्थित इंटेलिजेंस मंत्रालय के मुख्यालय को भी मलबे में तब्दील कर दिया है।

सटीक खुफिया जानकारी और तेहरान पर हवाई स्ट्राइक

इज़राइली सेना ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन’ पूरी तरह से सटीक इंटेलिजेंस पर आधारित था। इज़राइली लड़ाकू विमानों ने तेहरान की हवाई सुरक्षा को भेदते हुए उन विशिष्ट ठिकानों को निशाना बनाया जहाँ ईरानी खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बैठक कर रहे थे। इस हमले में न केवल मुख्यालय तबाह हुआ, बल्कि कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए हैं। इज़राइल के इस कदम को ईरान के भीतर उसकी पकड़ और खुफिया तंत्र की मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।

तेहरान के निवासियों ने बताया कि शहर में सोमवार की सुबह भीषण विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं। मंत्रालय की इमारत से उठता काला धुआं मीलों दूर से देखा जा सकता था। इज़राइल की इस कार्रवाई ने ईरान के सुरक्षा घेरे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि सुरक्षा के उच्चतम स्तर वाले मुख्यालय को दिनदहाड़े निशाना बनाया गया।

अमेरिका और इज़राइल का संयुक्त ‘एपिक फ्यूरी’ ऑपरेशन

यह ताज़ा तनाव तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक व्यापक सैन्य अभियान छेड़ा। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत अमेरिकी और इज़राइली वायु सेनाओं ने ईरान के परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर, मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स और लीडरशिप कंपाउंड्स पर समन्वित हमले किए। इस संयुक्त अभियान का उद्देश्य ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता को सीमित करना था।

28 फरवरी के उस हमले के बाद से ही मिडिल ईस्ट में एक पूर्ण विकसित युद्ध (Full-scale War) की स्थिति बन गई है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने अतिरिक्त युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात कर दिए हैं। पेंटागन की ओर से जारी बयानों में कहा गया है कि वे अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता ने भी “कठोर प्रतिशोध” की कसम खाई है, जिसके बाद मिसाइल हमलों का यह नया दौर शुरू हुआ है।

वैश्विक चिंता और मंडराता संकट

दुनियाभर के नेता और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस समय गहरी चिंता में हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने दोनों पक्षों से तुरंत युद्ध विराम की अपील की है, लेकिन ज़मीनी हालात इसके विपरीत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह जारी रहा, तो इसमें लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देश भी पूरी तरह से कूद सकते हैं, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल की आपूर्ति ठप हो जाएगी।

फिलहाल, लड़ाई जारी है और दोनों पक्ष एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुँचाने का दावा कर रहे हैं। तेहरान और तेल अवीव, दोनों ही राजधानियां युद्ध की विभीषिका झेल रही हैं। दुनिया इस समय एक बड़े क्षेत्रीय महायुद्ध के कगार पर खड़ी है, जिसका कोई स्पष्ट अंत दिखाई नहीं दे रहा है। आने वाले 24 घंटे इस संघर्ष की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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