West Bengal का चुनावी समर अपने सबसे रोमांचक और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता का दौरा कर न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के इस मजबूत गढ़ में सेंध लगाने के लिए एक अभेद्य चक्रव्यूह भी तैयार किया। अमित शाह का यह दौरा रणनीति और प्रतीकों, दोनों ही लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रणनीति का केंद्र: West Bengal में हाई-प्रोफाइल बैठक
West Bengal की राजधानी कोलकाता पहुँचते ही अमित शाह ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और चुनावी रणनीतिकारों के साथ एक लंबी और महत्वपूर्ण बैठक की। पार्टी कार्यालय में हुई इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य आगामी चरणों के लिए बूथ मैनेजमेंट को पुख्ता करना था। अमित शाह ने स्पष्ट संदेश दिया कि चुनाव केवल रैलियों से नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर मजबूती से जीते जाते हैं। उन्होंने संगठन विस्तार और पन्ना प्रमुखों की सक्रियता पर विशेष जोर दिया। भाजपा इस बार शहरी इलाकों में मध्यम वर्ग और युवाओं को साधने के लिए विशेष डिजिटल कैंपेन और डोर-टू-डोर संपर्क पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
कालीघाट मंदिर: आस्था और राजनीति का संगम
अपने व्यस्त चुनावी कार्यक्रम के बीच अमित शाह कालीघाट मंदिर पहुँचे, जो कोलकाता की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। माँ काली के चरणों में मत्था टेककर उन्होंने प्रदेश की खुशहाली और विजय का आशीर्वाद मांगा। हालांकि यह एक धार्मिक दौरा था, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे एक बड़े संदेश के रूप में देख रहे हैं। कालीघाट को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, और वहां शाह की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भाजपा अब विपक्षी किलों के भीतर जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। भाजपा उम्मीदवार स्वपन दासगुप्ता ने इस दौरे को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह जनता के बीच विश्वास पैदा करने का एक बड़ा जरिया है।
राशबिहारी सीट और कोलकाता का दंगल
इस बार कोलकाता की राशबिहारी विधानसभा सीट साख की लड़ाई बन गई है। यहाँ से भाजपा के दिग्गज नेता स्वपन दासगुप्ता मैदान में हैं। लंबे समय से यह क्षेत्र टीएमसी का अभेद्य दुर्ग रहा है, लेकिन इस बार जमीनी हकीकत बदलती दिख रही है। भाजपा का आरोप है कि यहाँ बुनियादी सुविधाओं और विकास की भारी अनदेखी हुई है। अमित शाह की रणनीति यहाँ के स्थानीय मुद्दों को उठाकर मतदाताओं को यह समझाने की है कि ‘डबल इंजन’ की सरकार ही कोलकाता की पुरानी भव्यता वापस ला सकती है।
टीएमसी के गढ़ में भाजपा की चुनौती
वर्तमान में कोलकाता की सभी 11 विधानसभा सीटों पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कब्जा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए अपनी पूरी सांगठनिक शक्ति का उपयोग कर रही हैं। वहीं, भाजपा ने इस बार शहरी वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाने का लक्ष्य रखा है। पार्टी का मानना है कि यदि कोलकाता की इन 11 सीटों पर परिणाम बदलते हैं, तो राज्य की सत्ता का समीकरण पूरी तरह से बदल जाएगा। अमित शाह ने नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे टीएमसी की विफलताओं को जनता के सामने ले जाएं और केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार करें।
लोकतंत्र का उत्सव और 4 मई का इंतजार
West Bengal Election के शुरुआती चरणों में मतदाताओं ने जिस प्रकार का उत्साह दिखाया है, वह काबिले तारीफ है। कई जिलों में 60 प्रतिशत से भी अधिक मतदान होना इस बात का सबूत है कि जनता बदलाव या निरंतरता को लेकर बहुत सजग है। चुनाव आयोग (ECI) ने भी अब तक की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण रखने में सफलता पाई है। अब पूरे देश की नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब मतगणना के साथ यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की जनता ने किसे अपनी सेवा का अवसर दिया है। अमित शाह का यह दौरा भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए संजीवनी की तरह रहा है, जो अब अंतिम दौर के मतदान के लिए पूरी ऊर्जा के साथ मैदान में उतर चुके हैं।







