West Bengal Assembly Election 2026: बंगाल में चुनावी बिगुल बजा, 8 के बजाय सिर्फ 2 चरणों में होगा मतदान; जानिए चुनाव आयोग के इस बड़े फैसले की वजह

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कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सियासत में हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग (ECI) ने बहुप्रतीक्षित ‘पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026’ की तारीखों की घोषणा कर दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, इस बार बंगाल की 294 सीटों पर किस्मत का फैसला केवल दो चरणों में होगा। मतदान के लिए 24 अप्रैल और 29 अप्रैल की तारीखें तय की गई हैं।

हैरानी की बात यह है कि साल 2021 में जहाँ 8 चरणों में चुनाव हुए थे, वहीं इस बार इसे घटाकर सिर्फ 2 फेज में समेट दिया गया है। आयोग के इस फैसले ने कई राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है। आइए समझते हैं कि आखिर चुनाव आयोग ने बंगाल जैसे संवेदनशील राज्य में इतना बड़ा जोखिम क्यों उठाया है?

दो चरणों में चुनाव: क्या है आयोग की ‘क्रोनोलॉजी’?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि चरणों की संख्या कम करने का फैसला काफी सोच-समझकर और जमीनी हकीकत को देखते हुए लिया गया है। इसके पीछे कुछ ठोस कारण हैं:

1. हिंसा की घटनाओं में भारी कमी साल 2021 के चुनाव बंगाल के इतिहास के सबसे हिंसक चुनावों में से एक थे, जहाँ करीब 52 लोगों की जान गई थी। लेकिन आयोग का मानना है कि 2026 के प्री-पोलिंग (चुनाव पूर्व) माहौल में वैसी हिंसा नहीं दिख रही है। शांति व्यवस्था कायम होने के कारण ही आयोग ने कम चरणों में चुनाव कराने का साहस दिखाया है।

2. छह महीने से जारी ‘क्लीनअप’ अभियान चुनाव आयोग इस बार बंगाल में पिछले साल अक्टूबर (2025) से ही सक्रिय है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के जरिए उन ‘अराजक तत्वों’ की पहचान की गई है जो चुनाव में गड़बड़ी फैला सकते थे। आयोग ने ऐसे नामों को वोटर लिस्ट से बाहर किया है और सुरक्षा तंत्र को पहले से ही मजबूत कर लिया है।

3. प्रशासन पर सीधा और कड़ा नियंत्रण 2021 में आयोग के पास तैयारियों के लिए महज दो महीने थे। लेकिन इस बार, अधिकारियों के तबादले और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को बहुत पहले ही नियोजित कर लिया गया है। प्रशासन पर सीधा नियंत्रण होने की वजह से आयोग को भरोसा है कि दो चरणों में भी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रहेगी।

कब और कहाँ होगा मतदान?

चुनाव आयोग ने भौगोलिक स्थिति और संवेदनशीलता को देखते हुए जिलों को दो हिस्सों में बांटा है:

  • प्रथम चरण (24 अप्रैल): इस दिन उत्तर बंगाल और जंगलमहल के 16 जिलों में वोट डाले जाएंगे। इसमें दार्जिलिंग, मालदा, पुरुलिया और झाड़ग्राम जैसे इलाके शामिल हैं। यहाँ सुरक्षा बलों की तैनाती को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • द्वितीय चरण (29 अप्रैल): इस चरण में कोलकाता, 24 परगना, हावड़ा और हुगली जैसे 7 मुख्य जिले शामिल हैं। यह घनी आबादी वाला शहरी क्षेत्र है, जिसे दूसरे और अंतिम चरण में कवर किया जाएगा।

मतदाताओं की सुविधा और प्रशासनिक खर्च

आयोग का मानना है कि लंबे समय तक चुनाव चलने से न केवल आम जनजीवन प्रभावित होता है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी बोझ बढ़ता है और सुरक्षा बल भी थक जाते हैं। दो चरणों में चुनाव होने से मतदाताओं को सुविधा होगी और चुनावी प्रक्रिया जल्दी और कुशलता से पूरी हो सकेगी।

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