Vijayadashami 2026 : मोहन भागवत के विजयादशमी भाषण से प्रभावित हुए पीएम मोदी, संबोधन को बताया ‘अत्यंत प्रेरणादायी’

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Vijayadashami 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी भाषण की तारीफ की। पीएम मोदी ने उनके संबोधन को ‘अत्यंत प्रेरणादायी’ बताते हुए कहा कि इसमें राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोर दिया गया। साथ ही उन्होंने चरित्र निर्माण और ‘पंच परिवर्तन’ की पहल को भी समाज के लिए अहम बताया।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मोहन भागवत के भाषण की सराहना की। उन्होंने कहा कि नागपुर में संघ के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव के दौरान भागवत ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। पीएम मोदी के मुताबिक, भाषण में सेवा, राष्ट्र निर्माण और समाज को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि सेवा और राष्ट्र निर्माण संघ के स्वयंसेवकों के जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ‘पंच परिवर्तन’ का भी जिक्र किया और इसे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मोहन भागवत के भाषण में इन मुद्दों पर रहा जोर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में संगठन के स्थापना दिवस पर आयोजित वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आत्म-जागरूकता, स्वदेशी, सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। भागवत ने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पिछले एक साल में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। विजयादशमी उत्सव को इन गतिविधियों के समापन के रूप में देखा गया।

उनके संबोधन में समाज के भीतर एकता बढ़ाने और लोगों को अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करने पर खास ध्यान दिया गया।

क्या है पंच परिवर्तन?

मोहन भागवत ने ‘पंच परिवर्तन’ को सामाजिक बदलाव, राष्ट्रीय प्रगति और व्यक्तिगत व्यवहार में सुधार लाने का महत्वपूर्ण खाका बताया। इसमें पांच प्रमुख विषय शामिल हैं।

  • सामाजिक समरसता: समाज के सभी वर्गों के बीच समानता, सम्मान और आपसी सहयोग बढ़ाना।
  • कुटुंब प्रबोधन: परिवार में अच्छे संस्कार, संवाद और आपसी जिम्मेदारी को मजबूत करना।
  • पर्यावरण चेतना: प्रकृति की रक्षा करना और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझना।
  • स्व-बोध और स्वदेशी: अपनी संस्कृति और पहचान को समझना तथा स्वदेशी वस्तुओं को प्रोत्साहित करना।
  • नागरिक अनुशासन: नियमों का पालन करना और एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाना।

इन पांच विषयों के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की बात कही गई है।

भागवत ने बताया क्यों जरूरी है पंच परिवर्तन

मोहन भागवत ने अपने भाषण में कहा कि पंच परिवर्तन से जुड़े मुद्दे आज हर जगह महसूस किए जा रहे हैं। परिवार के प्रति जागरूकता, नागरिक अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों की जरूरत केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी समझी जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंच परिवर्तन केवल एक साल तक चलने वाला कार्यक्रम नहीं है। इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाने की जरूरत है। उनके अनुसार, लोगों को अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा और इन विचारों को रोजमर्रा के जीवन में अपनाना होगा।

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