सरकारी वकीलों की फीस में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी: UP की Yogi cabinet जल्द दे सकती है मंजूरी

Yogi cabinet, UP

Share This Article

UP Yogi Cabinet Decisions: उत्तर प्रदेश के सरकारी वकीलों के लिए एक बहुत अच्छी खबर आ रही है। राज्य की योगी सरकार अदालतों में सरकार का पक्ष रखने वाले सरकारी अधिवक्ताओं की फीस और रिटेनरशिप में 50 प्रतिशत तक का इजाफा करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में होने वाली कैबिनेट बैठक में न्याय विभाग के इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। सबसे खास बात यह है कि इस फैसले का फायदा जिला अदालतों के वकीलों से लेकर सीधे महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) तक को मिलेगा।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो जिला न्यायालयों में काम करने वाले सरकारी वकीलों की फीस साल 2016 के बाद से नहीं बढ़ी है। वहीं, महाधिवक्ता की रिटेनरशिप और फीस में तो साल 2012 के बाद से कोई बदलाव नहीं हुआ है। लंबे समय से इसमें बदलाव की मांग की जा रही थी, जिसे देखते हुए अब सरकार यह कदम उठाने जा रही है।

किसको कितना मिलेगा फायदा?

इस नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद वकीलों की कमाई में अच्छा-खासा अंतर देखने को मिलेगा:

  • जिला शासकीय अधिवक्ता: इनकी मंथली रिटेनरशिप 9,000 रुपये से बढ़कर 14,000 रुपये हो सकती है। साथ ही हर सुनवाई की फीस 1,650 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये की जा सकती है।

  • अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC): इनकी रिटेनरशिप 7,200 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये और प्रति सुनवाई फीस 1,500 रुपये से 2,300 रुपये करने की तैयारी है।

  • महाधिवक्ता: इनकी मासिक रिटेनरशिप को 75,000 रुपये से सीधे 1.25 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। बहस करने की फीस भी 40,000 रुपये से बढ़कर 60,000 रुपये हो जाएगी।

    वहीं अपर महाधिवक्ताओं की रिटेनरशिप और फीस में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि का सुझाव दिया गया है।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष मजबूत करने वाले वकीलों की फीस भी बढ़ाई जाएगी।

यह भी पढ़ें: Patna में सनसनी: Khan Sir के कोचिंग सेंटर के बाहर चली गोली, सुरक्षा गार्ड घायल!

कैबिनेट बैठक में और क्या होगा खास?

इस कैबिनेट बैठक में सिर्फ वकीलों की फीस ही नहीं, बल्कि कई और अहम फैसले भी लिए जा सकते हैं। सूत्रों की मानें तो मुरादाबाद, औरैया, ललितपुर, कानपुर नगर और भदोही में नई जेल बनाने के बजट को हरी झंडी मिल सकती है। साथ ही खाद्य एवं रसद विभाग की मक्का क्रय नीति और सिंचाई, स्वास्थ्य, आबकारी, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति जैसे विभागों के करीब डेढ़ दर्जन प्रस्तावों पर चर्चा होनी है।

काफी सालों के इंतजार के बाद न्याय विभाग का यह कदम सरकारी वकीलों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। फीस बढ़ने से न सिर्फ अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि वे अदालतों में सरकार के मुकदमों की पैरवी और भी बेहतर ढंग से कर सकेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Are you human? Please solve:Captcha


Live Channel

Advertisement

[wonderplugin_slider id=1]

Live Poll

आपके क्षेत्र में सबसे मजबूत दल कौन है?
  • Add your answer

Also Read This