UP Farmers : उत्तर प्रदेश में बाढ़, अतिवृष्टि और चक्रवात से प्रभावित किसानों के लिए राहत की खबर है। जिन किसानों की फसलें प्राकृतिक आपदा के कारण खराब हुई हैं, उन्हें 12 अक्टूबर के बाद मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए प्रभावित जिलों में फसल नुकसान का सर्वे तेजी से कराया जा रहा है।
राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने बाढ़ प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को 12 अक्टूबर तक फसल क्षति का सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि यूपी फसल नुकसान मुआवजा देने से पहले नुकसान का सही आकलन जरूरी है। इसी वजह से प्रभावित इलाकों में सर्वे का काम प्राथमिकता से कराया जा रहा है।
बाढ़ के पानी में डूबी फसलों का डिजिटल फसल सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसी सर्वे के आधार पर पात्र किसानों को सहायता राशि दी जाएगी। राहत आयुक्त ने अधिकारियों को यह भी कहा कि केवल लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के आधार पर सर्वे को अंतिम न माना जाए। अधिकारी खुद मौके पर जाकर सर्वे की स्थिति और उसकी गुणवत्ता की जांच करें, ताकि किसी पात्र किसान का नाम छूट न जाए।
मौसम के आंकड़ों से होगा आकलन
फसल क्षति मुआवजा तय करने के लिए बारिश और फसल नुकसान का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाएगा। इसके लिए भारतीय मौसम विभाग और स्वचालित वर्षामापी केंद्रों से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे प्रभावित क्षेत्रों में बारिश और फसल नुकसान की स्थिति को सही तरीके से समझने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों को सर्वे की प्रगति की जानकारी हर दिन राहत पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकार को जिलों में चल रहे सर्वे की स्थिति की निगरानी करने में मदद मिलेगी। सर्वे पूरा होने के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
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