उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। अब आपको अपनी जनगणना के लिए केवल सरकारी प्रगणकों (Enumerators) के भरोसे बैठने की ज़रूरत नहीं है। राज्य में UP Digital Census 2027 की शुरुआत हो गई है, जिसके तहत गुरुवार से 'स्वगणना' यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का पोर्टल खोल दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद अपनी जानकारी पोर्टल पर भरकर इस अभियान का शुभारंभ करेंगे। यह कदम न केवल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देता है, बल्कि डेटा जुटाने की प्रक्रिया को भी काफी सरल बनाता है।

क्या है स्वगणना और इसकी समयसीमा?
जनगणना का पहला चरण शुरू होने से ठीक पहले स्वगणना की यह प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत लोग 21 मई तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद, 22 मई से प्रगणक घर-घर जाकर उन आंकड़ों की तस्दीक करेंगे। जिन लोगों ने स्वगणना पोर्टल पर हिस्सा नहीं लिया होगा, प्रगणक उनका ब्योरा मौके पर ही दर्ज करेंगे। UP Digital Census 2027 का यह पहला चरण 20 जून तक चलेगा, जिसमें मुख्य रूप से मकानों की सूची तैयार की जाएगी।

पूरी तरह डिजिटल होगा इस बार का सफर
इस बार की जनगणना की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह डिजिटल मोड में की जा रही है. अब कागजों के भारी-भरकम बंडलों की जगह टैबलेट और मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल होगा। UP Digital Census 2027 की सफलता के लिए प्रशासन ने एक विशेष पोर्टल se.census.gov.in तैयार किया है। लोगों को पोर्टल पर जाकर कुल 34 सवालों के जवाब देने होंगे, जिसके बाद उन्हें एक विशेष ‘एसई आईडी’ (SE ID) मिलेगी। जब सरकारी कर्मचारी आपके घर आएंगे, तो आपको बस यह आईडी दिखानी होगी और वे इसे पोर्टल पर वेरिफाई कर देंगे।

कर्मचारियों की ड्यूटी और तबादला नीति की चुनौती
इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए प्रदेश भर से लगभग 5 लाख कर्मचारियों को काम पर लगाया गया है। हालांकि, इसी बीच राज्य सरकार द्वारा जारी तबादला नीति ने थोड़ी चिंता भी बढ़ा दी है। दरअसल, तबादला सत्र की आखिरी तारीख 31 मई है, जबकि जनगणना का काम 20 जून तक चलेगा। यदि इसी दौरान कर्मचारियों का तबादला होता है, तो जनगणना का कार्य प्रभावित होने की आशंका है, फिलहाल, बचे हुए कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्य में काफी तेजी लाई जा रही है ताकि UP Digital Census 2027 बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके।

परिवार और मकान की नई परिभाषा
जनगणना के नियमों में इस बार ‘साझा रसोई’ को परिवार का आधार माना गया है, इसका मतलब है कि यदि लोग एक साथ रहते हैं और एक ही रसोई में खाना खाते हैं, तो उन्हें एक ही परिवार के तौर पर दर्ज किया जाएगा। वहीं, मकान की पहचान के लिए उसका अपना अलग मुख्य प्रवेश द्वार होना अनिवार्य है, चाहे वह आंगन या सड़क की तरफ खुलता हो। यह बारीकियां डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए तय की गई हैं।
पूछे जाने वाले प्रमुख 34 सवाल
जब आप UP Digital Census 2027 के लिए पोर्टल पर लॉगिन करेंगे, तो आपसे भवन की स्थिति और परिवार के विवरण से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। इसमें मकान की छत, दीवार और फर्श किस सामग्री से बने हैं, परिवार के पास इंटरनेट, मोबाइल, साइकिल या कार जैसी सुविधाएं हैं या नहीं, और पेयजल व शौचालय की व्यवस्था कैसी है, जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं, इसके अलावा मुखिया का नाम, लिंग और घर में इस्तेमाल होने वाले मुख्य अनाज, विवाहित जोड़ों की संख्या, रेडियो/ट्रान्जिस्टर, टेलीविजन, कार/जीप/वैन, पेयजल का मुख्य स्रोत, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय, शौचालय का प्रकार, अपशिष्ट जल निकासी, स्नान सुविधा, रसोई व एलपीजी व पीएनजी कनेक्शन, खाना पकाने का मुख्य ईंधन, अन्य: घर में मुख्य अनाज, मोबाइल नंबर की जानकारी इत्यादि देनी होगी।
स्वगणना की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज करना काफी आसान है। सबसे पहले आपको se.census.gov.in पर जाना होगा और अपना नाम व मोबाइल नंबर डालकर पंजीकरण करना होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद अपनी भाषा चुनें और मानचित्र पर अपने घर को चिह्नित करें। प्रश्नावली पूरी भरने के बाद फाइनल सबमिट करें और अपनी एसई आईडी संभाल कर रखें।
UP Digital Census 2027 उत्तर प्रदेश को डिजिटल सशक्तिकरण की ओर ले जाने वाला एक बड़ा कदम है। स्वगणना में भाग लेकर हम न केवल प्रशासन की मदद कर सकते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारी जानकारी सही और सटीक दर्ज हो। एक जागरूक नागरिक के तौर पर हमें इस डिजिटल अभियान का हिस्सा जरूर बनना चाहिए। पोर्टल पर जानकारी भरने से प्रगणकों का काम भी आसान होगा और डेटा प्रोसेसिंग में भी तेजी आएगी।
यह भी पढ़ें: UP में 07 मई से शुरू होगी Digital स्वगणना: जानें रेजिस्ट्रैशन की पूरी प्रक्रिया




