North Tech Symposium 2026: उत्तर प्रदेश बना आत्मनिर्भर भारत की नई ‘सुरक्षा ढाल’

North Tech Symposium

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संगम की पावन धरती, जो सदियों से ज्ञान और आध्यात्म की त्रिवेणी रही है, आज आधुनिक सैन्य तकनीक और नवाचार (Innovation) के एक नए ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ की साक्षी बनी है। नॉर्थ टेक संगोष्ठी (North Tech Symposium – NTS) 2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के बदलते स्वरूप और देश की सीमाओं की मजबूती का एक नया खाका पेश किया है।

सुशासन से सशक्त सैन्य निर्माण

इस पूरे आयोजन का सबसे बड़ा मुख्य आकर्षण (USP) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह विजन रहा, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि “राज्य की आंतरिक सुरक्षा ही देश की बाह्य सुरक्षा की आधारशिला है।” उन्होंने एक नए डिफेन्स मॉडल को दुनिया के सामने रखा—कि कैसे अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश ने भारत के सबसे बड़े ‘डिफेंस कॉरिडोर’ का मार्ग प्रशस्त किया है।

मुख्यमंत्री ने गौरव के साथ कहा:

“यदि हमें उत्तर प्रदेश में सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करना है और इसे पहचान के संकट से मुक्त करना है, तो हमें सुरक्षा का एक बेहतर वातावरण बनाना होगा। आज हमारे कानून के राज के मॉडल ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।”

UP का ‘जीरो टॉलरेंस’ मॉडल: निवेशकों और सेना का बढ़ा भरोसा

एक समय ‘बीमारू’ राज्य कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश की छवि अब बदल चुकी है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि वर्तमान सरकार के नेतृत्व में जब राज्य में माफिया राज खत्म हुआ, तभी ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें बनाने वाली कंपनियों का भरोसा यूपी पर जागा।

योगी आदित्यनाथ के शब्दों में:

“आज देश और दुनिया का हर बड़ा निवेशक उत्तर प्रदेश में निवेश करना चाहता है, क्योंकि यहाँ सुरक्षा का वातावरण है। कोई भी बाहरी तत्व या गुंडा तत्व अब विकास कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कानून-व्यवस्था में सुधार ही रक्षा उद्योग के विस्तार का आधार बना है।”

डिफेंस कॉरिडोर: ‘मेड इन यूपी’ अब दुनिया में मचाएगा धूम

नॉर्थ टेक संगोष्ठी (North Tech Symposium) के दौरान यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की सफलता को ‘हीरो’ के रूप में पेश किया गया। लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट के छह नोड्स अब केवल नाम नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति के केंद्र बन चुके हैं।

CM ने अपने संबोधन में कहा:

“कानपुर: कभी ‘मैनचेस्टर’ था, अब मिसाइलों और गोला-बारूद का हब है। लखनऊ: यहाँ ब्रह्मोस जैसी ‘नेक्स्ट जनरेशन’ सुपरसोनिक मिसाइलों का निर्माण हो रहा है। झांसी और चित्रकूट: यहाँ प्रिसिजन इंजीनियरिंग और भारी सैन्य साजो-सामान तैयार हो रहा है।”

मुख्यमंत्री ने गर्व से साझा किया कि भारत का रक्षा निर्यात ₹600 करोड़ से बढ़कर अब ₹40,000 करोड़ तक पहुँचने की ओर अग्रसर है, और इसमें यूपी का योगदान निर्णायक है।

आधुनिक युद्ध: गोलियों से ज्यादा साइबर क्रांति

तकनीकी क्रांति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने सेना के अधिकारियों और वैज्ञानिकों को आगाह किया कि भविष्य के युद्ध केवल जमीन या आसमान पर नहीं, बल्कि साइबर स्पेस में लड़े जाएंगे। उन्होंने कहा:

“अब कीबोर्ड भी एक हथियार है। दुश्मन के पावर ग्रिड और कम्युनिकेशन सिस्टम को ठप करना अब एक नई सुरक्षा रेखा है। आज का युद्ध हथियारों के साथ-साथ डाटा और टेक्नोलॉजी की भी भूमिका को रेखांकित करता है।”

सैनिकों का साहस और सरकार का संकल्प

मुख्यमंत्री ने भारतीय सेना की सेंट्रल और नॉर्दन कमांड के प्रयासों की सराहना करते हुए सैनिकों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक सैनिक जहाँ खड़ा होता है, वहीं से देश की सीमा शुरू होती है।

“हमारे सैनिकों की जागती हुई आँखों के कारण ही पूरा देश चैन की नींद सोता है। राष्ट्र (Nation First) हमारे लिए केवल नारा नहीं, हर भारतीय की सांस में बसने वाला संकल्प है।”

विकसित भारत का नया मार्ग

नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रयागराज का संगम अब केवल श्रद्धा का नहीं, बल्कि सैन्य-शक्ति और स्वदेशी तकनीक का भी संगम है। उत्तर प्रदेश ने अपनी ‘बीमारू’ छवि को पीछे छोड़कर खुद को भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित कर लिया है।

जैसा कि मुख्यमंत्री ने अंत में कहा—सुरक्षा, तकनीक और विश्वास के इसी संगम से हम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करेंगे। यह आयोजन केवल हथियारों की प्रदर्शनी नहीं था, बल्कि सुरक्षित और समृद्ध भारत की गारंटी था।

यह भी पढ़ें: UP में 07 मई से शुरू होगी Digital स्वगणना: जानें रेजिस्ट्रैशन की पूरी प्रक्रिया

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