Unnao Flood : उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में पिछले कई दिनों से गंगा नदी के शांत होने की उम्मीद जगा रहे लोगों को शनिवार को एक बार फिर झटका लगा है। कई दिनों से लगातार घट रहा गंगा का जलस्तर शनिवार सुबह अचानक फिर से मामूली रूप से बढ़ गया।
जलस्तर घटने के बावजूद शुक्लागंज और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति जस की तस बनी हुई है। बस्तियों में पानी जमा रहने से लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके साथ ही इलाके में संक्रामक बीमारियों का खतरा भी तेजी से मंडराने लगा है। आइए जानते हैं उन्नाव में गंगा नदी के जलस्तर की वर्तमान स्थिति और स्थानीय लोगों की समस्याएं।
उन्नाव में गंगा का जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार शाम 6 बजे गंगा का जलस्तर 112.290 मीटर दर्ज किया गया था। लेकिन शनिवार सुबह 6 बजे यह बढ़कर 112.340 मीटर पर पहुंच गया। इस तरह महज 12 घंटे में जलस्तर में 5 सेंटीमीटर का उछाल आया है।
हालांकि, इससे पहले गुरुवार शाम से शुक्रवार शाम के बीच जलस्तर में 5 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन शनिवार सुबह हुए इस मामूली उछाल ने तटवर्ती क्षेत्रों के निवासियों की चिंता फिर बढ़ा दी है।
निचले इलाकों में बना हुआ है जलभराव का संकट
जलस्तर में मामूली उतार-चढ़ाव के बीच शुक्लागंज और उसके आसपास की बस्तियों के हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, मोहम्मद नगर, शाही नगर, सैय्यद कंपाउंड, श्रीनगर, मालवीय नगर और मनोहर नगर के निचले हिस्सों में अब भी कई फीट पानी भरा हुआ है।
घरों के चारों तरफ पानी भरा होने के कारण लोगों का पैदल बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। लोग खाने-पीने और जरूरी सामान जुटाने के लिए नावों से आवाजाही करने को मजबूर हैं। बस्तियों से पानी की निकासी रफ्तार न पकड़ने की वजह से स्थानीय निवासियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा, कीटनाशक छिड़काव की मांग
कई दिनों से एक ही जगह पानी रुका होने की वजह से अब बस्तियों में बदबू और गंदगी फैलने लगी है। जमा पानी में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से मलेरिया, डेंगू, डायरिया, बुखार और त्वचा से जुड़े संक्रमण का डर फैल रहा है।
स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत सफाई अभियान चलाया जाए और एंटी-लार्वा व कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जाए। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और राहत कार्य जारी हैं।
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