Lucknow: पं. प्रताप नारायण मिश्र स्मृति 31वां युवा साहित्यकार सम्मान समारोह संपन्न, छह साहित्यकार हुए सम्मानित

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उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow के माधव सभागार, सरस्वती शिशु मंदिर, निराला नगर में पं. प्रताप नारायण मिश्र स्मृति 31वां युवा साहित्यकार सम्मान समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भाऊराव देवरस सेवा न्यास की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए युवा साहित्यकारों को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज रहे, जबकि अध्यक्षता अजय तनेजा, कुलपति, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय ने की। समारोह में साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

Lucknow

साहित्य समाज और राष्ट्र को दिशा देता है

मुख्य अतिथि स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को दिशा देने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ साहित्य सदियों तक जीवित रहता है और राष्ट्र चेतना को जागृत करता है। स्वामी जी ने महर्षि वेदव्यास, वाल्मीकि और कालिदास जैसे महान साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकमंगल के लिए रचा गया साहित्य ही सर्वोच्च होता है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज के समय में ऐसा साहित्य सृजित होना चाहिए, जो समाज में ऊर्जा, सेवा और समर्पण की भावना विकसित करे। उनके अनुसार, जो साहित्य राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है, वही सच्ची राष्ट्रोन्नति का आधार बनता है।

युवा साहित्यकार समाज की प्राणवायु

कार्यक्रम अध्यक्ष अजय तनेजा ने अपने संबोधन में युवा साहित्यकारों को समाज की प्राणवायु बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है, जब युवा रचनाकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को सही दिशा देंगे। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि वर्तमान समय में अच्छे साहित्य को पहचान और सम्मान मिलना अत्यंत आवश्यक है।

Lucknow

छह युवा साहित्यकारों को किया गया सम्मानित

समारोह में कुल छह युवा साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। इनमें—

  • काव्य विधा: राहुल शिवाय (बेगूसराय)

  • कथासाहित्य: वंदना चौबे (लखनऊ)

  • पत्रकारिता: अंशुमान झा (पटना)

  • बाल साहित्य: शादाब आलम (अलीगढ़)

  • संस्कृत साहित्य: दीपिका दीक्षित (नई दिल्ली)

  • भूटिया भाषा: जिग्मी वांगचुक भूटिया (सिक्किम)

प्रत्येक सम्मानित साहित्यकार को 25 हजार रुपये की धनराशि, स्मृति चिन्ह तथा पं. प्रताप नारायण मिश्र द्वारा रचित साहित्य भेंट किया गया। समारोह के अंत में साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प भी लिया गया।

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