Sujit Bose Arrested: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता सुजीत बोस को गिरफ्तार किया। यह पूरी कार्रवाई राज्य में हुए कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़ी है। अधिकारियों का कहना है कि कोलकाता के साल्ट लेक स्थित दफ्तर में करीब 11 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद Sujit Bose Arrested की कार्रवाई की गई। जांचकर्ताओं के मुताबिक, सुजीत बोस पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं कर रहे थे और उनके जवाब काफी गोल-मोल थे।
भर्ती घोटाले में क्या थी भूमिका?
जांच एजेंसियों का दावा है कि जब सुजीत बोस दक्षिण दमदम नगरपालिका में उपाध्यक्ष के पद पर थे, तब वहां बड़े पैमाने पर नियुक्तियों में धांधली हुई थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने लगभग 150 लोगों को गलत तरीके से नौकरी दिलाने में मदद की और इसके बदले में आर्थिक लाभ यानी पैसा लिया। Sujit Bose Arrested होने के पीछे एक मुख्य कारण यह भी है कि उनके पास से कुछ ऐसे फ्लैट्स और बैंक ट्रांजेक्शन मिले हैं, जिन्हें ईडी “अपराध की कमाई” मान रही है। सुजीत बोस के लिए पिछला कुछ समय काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। बिधाननगर से तीन बार विधायक रहे बोस हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा के उम्मीदवार से हार गए थे। चुनाव के तुरंत बाद Sujit Bose Arrested होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा सरकार के सत्ता संभालने के बाद इसे टीएमसी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आगे की राह
इस गिरफ्तारी के बाद राजनीति भी गरमा गई है। जहां भाजपा इसे कानून की जीत बता रही है, वहीं सीपीआई (एम) का कहना है कि असली बड़े नाम तो अभी भी बाहर हैं। Sujit Bose Arrested होने के बाद अब उन्हें विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां ईडी उनकी आगे की कस्टडी की मांग करेगी ताकि घोटाले की तह तक जाया जा सके।
Sujit Bose Arrested: क्या यह सिर्फ शुरुआत है?
जांच एजेंसी के रडार पर बंगाल की कई अन्य नगरपालिकाएं भी हैं, जिनमें कांचरापाड़ा, दम दम और कमरहाटी शामिल हैं। इस घोटाले की जड़ें काफी गहरी बताई जा रही हैं, जिसमें ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ कर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरियां दी गई थीं।