भगवान भोलेनाथ की भक्ति और आराधना का पावन समय यानी ‘सावन का पवित्र महीना’ (Sawan) शुरू हो चुका है। देश भर में भक्तों ने पूरे हर्षोल्लास और अपार श्रद्धा के साथ इस महीने का स्वागत किया है। सुबह-सवेरे से ही शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। ‘हर-हर महादेव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।
हिंदू पंचांग के अनुसार यह पांचवां महीना है, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है। मानसून के समय आने वाला यह महीना आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु व्रत रखकर, जलाभिषेक करके और कांवड़ यात्रा निकालकर महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।
सावन माह का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने का संबंध समुद्र मंथन की ऐतिहासिक घटना से जुड़ा हुआ है। कथाओं के अनुसार, जब समुद्र मंथन के दौरान भीषण विष निकला, तो पूरी सृष्टि पर संकट छा गया। तब भगवान शिव ने संसार को बचाने के लिए उस विष का पान कर लिया और उसे अपने कंठ (गले) में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया, जिसके बाद से उन्हें ‘नीलकंठ’ कहा जाने लगा। विष की जलन को शांत करने के लिए ही देवताओं ने महादेव पर जल अर्पित किया था, इसलिए सावन में जलाभिषेक का विशेष महत्व है।

इसके अलावा, ऐसा माना जाता है कि देवी पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए इसी महीने में कठोर तपस्या की थी। यही वजह है कि मनचाहा जीवनसाथी पाने, वैवाहिक जीवन में मिठास घोलने और घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए श्रद्धालु सावन के हर सोमवार को व्रत रखते हैं।
भारत के 12 ज्योतिर्लिंग
सावन के पावन अवसर पर शिव जी के उन 12 पवित्र धामों का स्मरण करना बेहद पुण्यदायी माना जाता है, जिन्हें 12 ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। मान्यता है कि इन स्थानों पर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे।
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सोमनाथ (गुजरात)
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मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश)
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महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश)
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ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)
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केदारनाथ (उत्तराखंड)
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भीमाशंकर (महाराष्ट्र)
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काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश)
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त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र)
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वैद्यनाथ (झारखंड)
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रामेश्वरम (तमिलनाडु)
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घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)
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नागेश्वर (गुजरात)
सावन के दौरान नियमित रूप से शिवलिंग पर शुद्ध जल, दूध, शहद और बेलपत्र चढ़ाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।







