Savarkar Jayanti 2026: लखनऊ में राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता पर महामंथन, ‘माय होम इंडिया’ के मंच पर जुटे दिग्गज

Savarkar Jayanti 2026

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Savarkar Jayanti 2026: राजधानी लखनऊ के गोमती नगर, विपिन खंड स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज भागीदारी भवन में शनिवार को एक भव्य वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘माय होम इंडिया’ संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर जयंती महोत्सव 2026‘ में देश और प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी कई प्रबुद्ध हस्तियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्रांतिसूर्य स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर के राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और अखंड भारत के विचारों को वर्तमान पीढ़ी के सामने लाना था। सायं 5:00 बजे दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस गरिमामय आयोजन में भारी संख्या में स्थानीय नागरिक सपरिवार शामिल हुए।

मुख्य अतिथि समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने सावरकर के विजन को सराहा

इस भव्य महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग (स्वतंत्र प्रभार) के मंत्री असीम अरुण उपस्थित रहे। कैबिनेट मंत्री असीम अरुण ने सावरकर के सामाजिक सुधारों और आधुनिक भारत के विजन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सावरकर केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि एक प्रखर समाज सुधारक भी थे, उनका विजन एक ऐसे सशक्त और समरस समाज का निर्माण करना था जहां राष्ट्रहित से ऊपर कुछ भी न हो।

मंच पर जुटे देश-प्रदेश के दिग्गज, सावरकर के इतिहास लेखन पर हुई चर्चा

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री श्री कृपाशंकर सिंह ने की। उन्होंने महाराष्ट्र की धरती से उभरे इस महान क्रांतिकारी के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि सावरकर जी ने देश को इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की दृष्टि दी।

वहीं, संगोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव एवं ‘माय होम इंडिया’ के संस्थापक श्री सुनील देवधर ने सावरकर के जीवन दर्शन, उनके साहित्यिक योगदान और वैचारिक यात्रा को बेहद तार्किक और शोधपरक ढंग से श्रोताओं के सामने साझा किया। उन्होंने सावरकर के हिंदुत्व की परिभाषा को राष्ट्रीयता से जोड़ते हुए स्पष्ट किया। इस विचार मंथन के दौरान उत्तर प्रदेश के पूर्व बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. (डॉ.) सतीश द्विवेदी भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर गरिमामयी उपस्थिति में मौजूद रहे और उन्होंने सावरकर के शैक्षिक व बौद्धिक योगदान को याद किया।

एडीसीपी जितेंद्र कुमार दुबे ने युवाओं को दिया राष्ट्र सेवा का संदेश

इस विशेष वैचारिक संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) जितेंद्र कुमार दुबे उपस्थित रहे। मंच से सभा को संबोधित करते हुए एडीसीपी जितेंद्र कुमार दुबे ने सावरकर के ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांतों को आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शक और प्रेरणादायी स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि सावरकर का पूरा जीवन अटूट देशभक्ति, असीम त्याग और मातृभूमि के प्रति परम समर्पण की एक जीवंत मिसाल है।

 एडीसीपी जितेंद्र कुमार दुबे ने कानून-व्यवस्था और राष्ट्र सेवा के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं के लिए मातृभूमि की सेवा ही सर्वोपरि कर्तव्य होनी चाहिए। उन्होंने सावरकर के महान विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया ताकि युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय चेतना का और अधिक विस्तार हो सके।

‘काला पानी की अमानवीय यातनाएं भी नहीं डिगा सकीं सावरकर का हौसला’

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए एडीसीपी जितेंद्र कुमार दुबे ने सावरकर के ऐतिहासिक संघर्षों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत द्वारा अंडमान की सेल्युलर जेल में दी गईं ‘काला पानी’ की रोंगटे खड़े कर देने वाली अमानवीय यातनाएं भी स्वातंत्र्यवीर सावरकर के फौलादी हौसलों को डिगा नहीं सकीं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने स्वतंत्र और अखंड भारत का जो सपना देखा था, उसे कभी ओझल नहीं होने दिया। एडीसीपी ने बल देकर कहा कि सावरकर का सामाजिक समरसता (जातिवाद से मुक्त समाज) और एक सूत्र में बंधे भारत का संदेश आज के इक्कीसवीं सदी के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक और व्यावहारिक है, जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था।

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Savarkar Jayanti 2026 पर प्रबुद्धजनों की गरिमामयी उपस्थिति और राष्ट्र निर्माण का सामूहिक संकल्प

‘माय होम इंडिया परिवार’ की ओर से आयोजित इस भव्य समारोह के समापन सत्र में सभी वक्ताओं ने सामूहिक रूप से सावरकर के इतिहास लेखन, राष्ट्रवाद और समाज सुधार के प्रति उनके अद्वितीय योगदान को नमन किया। इस वृहद और सफल आयोजन को धरातल पर उतारने और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में राम प्रताप सिंह, आलोक रंजन सिंह और अखिल चतुर्वेदी समेत संस्था के प्रमुख पदाधिकारियों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही। देर शाम तक चले इस कार्यक्रम में उपस्थित जनसैलाब ने सावरकर जी के पदचिन्हों पर चलते हुए देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को अक्षुण्ण बनाए रखने का सामूहिक संकल्प दोहराया।

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