Sambhal: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर को लेकर चल रहा कानूनी विवाद एक बार फिर चर्चा में है। बुधवार को इस मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई होनी थी, लेकिन ऊपरी अदालत के आदेशों के चलते इसे आगे बढ़ा दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के स्टे से रुकी कार्यवाही
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अब 26 मई 2026 की तारीख तय की है। दरअसल, यह सुनवाई उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा दिए गए स्टे आदेश की वजह से नहीं हो सकी। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता श्रीगोपाल शर्मा ने बताया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का स्टे प्रभावी है, तब तक निचली अदालत में इस मामले की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकती।

क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद 19 नवंबर 2024 को शुरू हुआ था, जब आठ याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दावा किया कि संभल की शाही जामा मस्जिद असल में हरिहर मंदिर है। इसके बाद निचली अदालत ने मस्जिद परिसर के सर्वे का आदेश दिया था। मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे के खिलाफ पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल स्टे मिल गया।

मुस्लिम पक्ष का रुख
मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता शकील अहमद वारसी ने पुष्टि की है कि सुप्रीम कोर्ट में अभी मामला लंबित है और कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। खास बात यह है कि इस मामले में अभी तक मुस्लिम पक्ष की ओर से अपना लिखित बयान भी दाखिल नहीं किया गया है। अब सभी की नजरें 26 मई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
संभल का यह मामला काफी संवेदनशील है और कानूनी दांव-पेच के बीच फंसा हुआ है। सर्वे के आदेश पर रोक लगने के बाद अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। जब तक वहां से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं आता, स्थानीय अदालत में इस पर कोई बड़ी प्रगति होने की उम्मीद कम ही है।
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