Haridwar: उत्तराखंड की देवभूमि में सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से बनाए गए धार्मिक ढांचों के खिलाफ प्रशासन का कड़ा अभियान जारी है। इसी कड़ी में धर्मनगरी हरिद्वार के गढ़मीरपुर तहसील क्षेत्र में जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बनी मजार पर बुलडोजर चलवाया। यह मजार सिंचाई विभाग की सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाई गई थी।
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नोटिस के बाद हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, हरिद्वार जिला प्रशासन ने सुमन नगर स्थित सिंचाई विभाग की इस जमीन पर बने अवैध निर्माण को लेकर करीब एक महीने पहले ही नोटिस जारी किया था। प्रशासन ने मजार के खादिमों से जमीन के मालिकाना हक और निर्माण से जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा था। लेकिन जब तय समय सीमा के भीतर कोई वैध सबूत नहीं दिए गए, तो प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर इस अवैध संरचना को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
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जमीन के नीचे नहीं मिले कोई अवशेष
इस कार्रवाई के दौरान एक दिलचस्प बात यह सामने आई कि मजार को ध्वस्त किए जाने के बाद वहां खुदाई में किसी भी प्रकार के मानव अवशेष या कोई अन्य पुरातात्विक साक्ष्य नहीं मिले। इससे प्रशासन के उन दावों को मजबूती मिली कि यह केवल जमीन कब्जाने के उद्देश्य से बनाया गया एक ढांचा था। इस अभियान के जरिए लगभग 10 बीघा सरकारी जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है।
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धामी सरकार का ‘एंटी-अतिक्रमण’ अभियान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्रवाई पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड और विशेषकर हरिद्वार की सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश भर में ऐसी लगभग 600 अवैध संरचनाओं को हटाया जा चुका है। सीएम ने कहा कि सरकारी जमीनों पर कब्जा करके किसी भी प्रकार का पाखंड या अवैध धंधा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा।
उत्तराखंड सरकार का यह अभियान उन लोगों के लिए कड़ा सबक है जो मजहब की आड़ में सरकारी जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं। प्रशासन की मुस्तैदी और मुख्यमंत्री के सख्त तेवर यह साफ कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में ऐसी अवैध गतिविधियों पर लगाम और भी कसी जाएगी। यह कदम न केवल सरकारी संसाधनों की रक्षा करेगा, बल्कि देवभूमि के वास्तविक स्वरूप को भी सुरक्षित रखेगा।
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