जाँच में फर्जी पाई गई प्रधानाध्यापक के विरुद्ध शिकायत, मानहानि की होगी कार्यवाही

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हरदोई। बावन ब्लॉक के पीएम श्री विद्यालय मुजाहिदपुर में प्रधानाध्यापक के खिलाफ दर्ज की गई शिकायत की सच्चाई आखिरकार सामने आ गई है। जांच में पाया गया कि शिकायत पूरी तरह से फर्जी और तथ्यों से परे थी। विद्यालय के अभिभावकों और ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रधानाध्यापक हेमंत पाण्डेय के पक्ष में अपना समर्थन जताया और बताया कि उनके नेतृत्व में विद्यालय का शैक्षिक स्तर पहले की तुलना में काफी बेहतर हुआ है। जांच के दौरान बच्चों से सवाल-जवाब कर शिक्षा की गुणवत्ता परखी गई, जिसमें विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास के साथ संतोषजनक उत्तर दिए। इससे यह साफ हो गया कि विद्यालय में शिक्षा का माहौल अनुशासित और गुणवत्तापूर्ण है। अभिभावकों ने भी प्रधानाध्यापक के पक्ष में अपने बयान दर्ज कराते हुए कहा कि विद्यालय में सरकारी योजनाओं का पूर्ण पालन किया जाता है और बच्चों को हर सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

दरअसल, आईजीआरएस पोर्टल पर मुजाहिदपुर निवासी संदीप पुत्र रामभरोसे ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रधानाध्यापक नशे की हालत में विद्यालय पहुंचते हैं, बाहरी लोगों को स्कूल में बुलाया जाता है और वहां राजनीतिक चर्चाएं की जाती हैं। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने पूरे मामले की जांच का जिम्मा बीईओ बावन प्रभाष कुंवर श्रीवास्तव को सौंपा। बीईओ 30 अक्टूबर को विद्यालय पहुंचे और वहां की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों से विस्तृत बातचीत की। महिपाल, गंगाचरण, वंदना, रामरानी, मंशा देवी, नीरा और रजनीश जैसे अभिभावकों ने स्पष्ट कहा कि शिकायत में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रधानाध्यापक हेमंत पाण्डेय की मेहनत और ईमानदारी से विद्यालय का माहौल सकारात्मक हुआ है और बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी है।

बीईओ की जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय पूरी तरह से सीसीटीवी कैमरों से लैस है, जिससे हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जाती है। ऐसे में किसी तरह की अनुशासनहीनता या नशे की हालत में आने का प्रश्न ही नहीं उठता। जांच अधिकारी ने बताया कि जब शिकायतकर्ता को मौके पर बुलाया गया तो उसने खुद को दिल्ली में बताकर जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि शिकायत व्यक्तिगत रंजिश के कारण दर्ज कराई गई थी।

प्रधानाध्यापक हेमंत पाण्डेय ने इस पूरे मामले पर कहा कि यह फर्जी शिकायत न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को धूमिल करने का प्रयास है, बल्कि इससे पूरे बेसिक शिक्षा विभाग की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि वह इस झूठी शिकायत के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे और मानहानि की नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पाण्डेय ने यह भी कहा कि उनका पूरा ध्यान बच्चों की शिक्षा और विद्यालय के विकास पर केंद्रित है और इस तरह की निराधार शिकायतों से उनका मनोबल कम नहीं होगा।

बीईओ प्रभाष कुंवर श्रीवास्तव ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है, जिसमें यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं हो सकी। रिपोर्ट में कहा गया है कि विद्यालय में शिक्षा का स्तर संतोषजनक है, विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय आते हैं, और सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन किया जा रहा है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में इस तरह की निराधार शिकायतों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए ताकि ईमानदारी से काम कर रहे शिक्षकों की छवि धूमिल न हो।

विद्यालय में अब माहौल सामान्य हो चुका है और विद्यार्थी पुनः अपनी पढ़ाई पर पूरी तन्मयता से जुट गए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि हेमंत पाण्डेय जैसे शिक्षकों की बदौलत गांव के बच्चों का भविष्य उज्जवल हो रहा है। यह प्रकरण एक मिसाल बन गया है कि सच्चाई चाहे देर से सामने आए, लेकिन अंततः झूठ और षड्यंत्र को पराजित करती है।

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