PM Modi statement on 1975 emergency: आज हमारे देश के इतिहास का एक ऐसा पन्ना पलटा जा रहा है जिसे याद करके आज भी लोग सिहर उठते हैं। साल 1975 में आज ही के दिन यानी 25 जून को देश में आपातकाल लागू किया गया था। इस साल आपातकाल की 51वीं बरसी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस फैसले को लेकर कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। गुरुवार को अपने एक बयान में उन्होंने इस दौर को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय करार दिया। पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि इतिहास के इस काले दौर को बार-बार याद रखने की जरूरत है, ताकि भविष्य में कोई भी दोबारा इस तरह का कदम उठाने या लोकतंत्र को कुचलने की हिम्मत न कर सके।
आपातकाल की बरसी
आज जब हम आजाद भारत की बात करते हैं, तो लोकतांत्रिक अधिकारों की बात सबसे पहले आती है। लेकिन 1975 का वह दौर कुछ अलग था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को याद दिलाया कि इस दिन को क्यों कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सत्ता को बचाए रखने के लिए जिस तरह से पूरे देश को एक जेलखाने में बदल दिया गया था, वह वाकई दर्दनाक था। इस बरसी पर देश के उन सभी संघर्ष करने वाले लोगों को याद किया जा रहा है जिन्होंने उस कठिन समय में भी घुटने नहीं टेके और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल जाना स्वीकार किया।
PM Modi का बयान
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने बहुत ही भावुक और कड़ा संदेश दिया है। PM Modi ने कहा कि यह दाग हमारे इतिहास पर हमेशा रहेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस बात को बार-बार याद दिलाना किसी को भला-बुरा कहने के लिए नहीं है, बल्कि इसलिए जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियां सतर्क रहें। उन्होंने देश के नागरिकों से कहा कि इस पाप के रास्ते पर दोबारा किसी को भी जाने की इच्छा न हो, यही सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है। संविधान की दुहाई देने वाले लोगों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग आज संविधान की बातें करते हैं, उनके पूर्वजों ने ही इसे पूरी तरह से कुचलने का काम किया था।
संविधान हत्या दिवस (Samvidhan Hatya Diwas)
प्रधानमंत्री ने इस बार सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने के लिए एक विशेष माध्यम चुना। पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर हैशटैग ‘Samvidhan Hatya Diwas’ के साथ एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने अपने फॉलोअर्स और देश की जनता से पूछा, “क्या आप जानते हैं कि हमारे लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून इतना महत्वपूर्ण क्यों है?” उन्होंने आगे लिखा कि आपातकाल लगाने वालों के माथे पर उस गंभीर पाप का कलंक हमेशा के लिए लग गया है। आज हम उन सभी लोगों को सलाम करते हैं, जो डटकर खड़े रहे, क्योंकि उन्हीं के त्याग की वजह से हमारा लोकतंत्र आज बचा हुआ है।
इंदिरा गांधी आपातकाल 1975
अपने इस डिजिटल पोस्ट में पीएम मोदी ने उस दौर की एक पुरानी ऑडियो क्लिप भी शेयर की। इस पोस्ट की शुरुआत में इंदिरा गांधी के आपातकाल की घोषणा का अंश शेयर किया गया है, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री को रेडियो पर यह कहते सुना जा सकता है कि “राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है।” इस वीडियो और ऑडियो के जरिए प्रधानमंत्री ने युवाओं को यह समझाने की कोशिश की कि कैसे एक झटके में पूरे देश के अधिकार छीन लिए गए थे। उन्होंने इस पोस्ट का शीर्षक दिया, “आपातकाल की 51वीं बरसी- जानिए क्यों इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है।”
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भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय
अपने विस्तृत संदेश में पीएम मोदी ने उस समय की ज्यादतियों का जिक्र करते हुए न्यायपालिका और प्रेस की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आपातकाल लगाने वालों ने न सिर्फ हमारे संविधान की हत्या की, बल्कि उनका इरादा न्यायपालिका को भी अपना गुलाम बनाए रखने का था। अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंट दिया गया था और देश के मीडिया को पूरी तरह से दबोच दिया गया था। जॉर्ज फर्नांडिस जैसे बड़े नेताओं को जंजीरों में जकड़ा गया और मीसा कानून के तहत छात्रों और आम लोगों को बिना किसी वारंट के कठोर यातनाएं दी गईं।
प्रधानमंत्री ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने खुद इस दौर को बहुत निकट से देखा है। करोड़ों लोगों का जीना मुश्किल हो गया था। लेकिन भारत की जनता का लोकतंत्र पर जो विश्वास था, वह इतनी प्रताड़ना के बाद भी नहीं डिगा। जब हर तरफ डर का माहौल था और लोगों को लगता था कि पुलिस कभी भी आकर उन्हें उठा लेगी, तब भी देश की जनता ने चुनाव में जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर लोकतंत्र के पक्ष में वोट किया और इसे दोबारा स्थापित किया। यह हमारे देश के मतदाताओं की असली ताकत को दिखाता है।
1975 का आपातकाल हमेशा एक सबक की तरह याद किया जाता रहेगा। पीएम मोदी के इस ताजा बयान ने एक बार फिर इस बहस को जिंदा कर दिया है कि सत्ता के अहंकार में लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने के नतीजे कितने गंभीर हो सकते हैं। आज के समय में जब हम एक मजबूत और जीवंत लोकतंत्र का हिस्सा हैं, तो यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि हम संविधान के मूल्यों की रक्षा करें। इतिहास की ऐसी गलतियों को याद रखना हमें भविष्य में और अधिक सतर्क और जागरूक नागरिक बनाने में मदद करता है।
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