Venezuela में प्रकृति का कहर: लगातार 2 शक्तिशाली भूकंपों से भारी तबाही, PM Modi और Trump ने जताया दुख

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Venezuela: दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela से एक बहुत ही परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। वहां आए लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों ने व्यापक तबाही मचाई है। बुधवार की शाम को आए इन बैक-टू-बैक झटकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि राजधानी काराकास सहित कई प्रमुख शहरों में बड़ी-बड़ी इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। इस अचानक आई आपदा के बाद से पूरे इलाके में चीख-पुकार मची हुई है और मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। इस संकट की घड़ी में भारत और अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने वेनेजुएला की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है।

Venezuela भूकंप समाचार

शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में बड़े पैमाने पर जानमाल के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। चूंकि यह हादसा बुधवार की शाम को हुआ, जब ज्यादातर लोग अपने घरों में मौजूद थे, इसलिए नुकसान का दायरा बहुत बड़ा होने का अनुमान है। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में आपातकाल (स्टेट ऑफ इमरजेंसी) घोषित कर दिया है। सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें और वीडियो आ रहे हैं, उन्हें देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। सड़कों पर बिखरा मलबा, रोते-बिलखते लोग और चारों तरफ फैली धूल इस बात की गवाही दे रही है कि वहां हालात कितने गंभीर हैं।

पीएम मोदी ने जताई संवेदना

इस दुखद घटना पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर वेनेजुएला में आए भूकंप पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस त्रासदी से वह बेहद व्यथित हैं। उन्होंने भारत की जनता की ओर से Venezuela की सरकार और वहां के लोगों, विशेषकर अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है और इस कठिन समय में प्रभावित लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

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Trump बोले- शुरुआती रिपोर्ट अच्छी नहीं

दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस घटना को बेहद दुखद बताया है। Donald Trump  ने कहा कि वेनेजुएला में आए दोनों बड़े भूकंपों से भारी जनहानि हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहायता के लिए तैयार है और संबंधित एजेंसियों को तत्काल तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। Trump ने साफ किया कि शुरुआती रिपोर्टें अच्छे संकेत नहीं दे रही हैं और अमेरिका वेनेजुएला के लोगों की मदद के लिए उपलब्ध रहेगा। अमेरिकी प्रशासन ने राहत सामग्री और बचाव दलों को रवाना करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

यूएसजीएस ने जताई भारी जनहानि की आशंका

इस भूकंप की वैज्ञानिक निगरानी कर रही अमेरिकी संस्था यूएसजीएस (USGS) की रिपोर्ट भी बेहद चिंताजनक है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने चेतावनी दी है कि इस आपदा में मरने वालों की संख्या हजारों तक पहुंच सकती है। एजेंसी ने अनुमान जताया है कि हालात की गंभीरता को देखते हुए जनहानि और नुकसान का स्तर काफी बड़ा हो सकता है। उनके मुताबिक, जिन इलाकों में भूकंप का केंद्र था, वहां की आबादी और मकानों की बनावट को देखते हुए यह एक बड़ी मानवीय त्रासदी का रूप ले सकता है।

काराकास में महसूस हुए तेज झटके

भूकंप का असर वेनेजुएला के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों पर पड़ा है। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, राजधानी काराकास में भूकंप के झटकों से घरों की खिड़कियां हिलने लगीं और कई स्थानों पर बुकशेल्फ गिर गए। लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंची इमारतों से भागकर खुले मैदानों और सड़कों की तरफ दौड़े। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में शहर की सड़कों पर कई क्षतिग्रस्त और गिरी हुई इमारतें दिखाई दे रही हैं। पूर्वी काराकास के अल्तामिरा जैसे पॉश इलाकों में भी बहुमंजिला इमारतें जमींदोज हो गई हैं।

एक मिनट के अंतराल पर आए दो बड़े भूकंप

इस आपदा की सबसे खतरनाक बात यह रही कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। यूएसजीएस के अनुसार पहला भूकंप बुधवार शाम 2204 जीएमटी पर 7.2 तीव्रता का दर्ज किया गया। इसके लगभग एक मिनट बाद (महज 39 सेकंड बाद) 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली भूकंप आया। दोनों भूकंपों का केंद्र काराकास से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित तटीय शहर मोरोन के निकट था। इसे विज्ञान की भाषा में ‘सिस्मिक डबलेट्स’ कहा जाता है, जहां एक के बाद एक दो बड़े झटके आते हैं।

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कम गहराई के कारण बढ़ा खतरा

भूवैज्ञानिकों का कहना है कि इस भूकंप के इतना विनाशकारी होने के पीछे इसकी गहराई भी एक बड़ी वजह है। दोनों भूकंप लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर आए, जिससे उनका प्रभाव अधिक विनाशकारी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार कम गहराई वाले भूकंप आमतौर पर सतह पर ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं क्योंकि उनकी ऊर्जा सीधे जमीन के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करती है। यही वजह है कि मोरोन और उसके आसपास के राज्यों में जमीन बुरी तरह हिल गई।

कई शहरों में हुआ नुकसान

Venezuela प्रशासन इस समय पूरी तरह से राहत कार्यों में जुट गया है। Venezuela के गृह, न्याय एवं शांति मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने बताया कि भूकंप के कारण देश के विभिन्न शहरों में नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि काराकास महानगरीय क्षेत्र के पूर्वी हिस्से में कई इमारतें गिर गई हैं, हालांकि मृतकों और घायलों की आधिकारिक संख्या तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी है। देश का मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (सिमोन बोलिवर एयरपोर्ट) भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके चलते सभी उड़ानें रोक दी गई हैं।

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लोगों से घरों से बाहर रहने की अपील

लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के हल्के झटके) ने प्रशासन और लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है। डियोसडाडो कैबेलो ने नागरिकों से अगले कुछ घंटों तक इमारतों के भीतर जाने से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आफ्टरशॉक्स के कारण पहले से क्षतिग्रस्त इमारतें और गिर सकती हैं। साथ ही लोगों से शांत रहने और राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग करने का आग्रह किया गया है। मौसम खराब होने और बिजली गुल होने की वजह से रात के समय राहत कार्य में काफी दिक्कतें भी आईं।

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कोलंबिया में भी महसूस किए गए झटके

इस भूकंप का असर सिर्फ वेनेजुएला तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके झटके सीमा पार भी महसूस किए गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भूकंप के झटके पड़ोसी देश कोलंबिया के कई शहरों में भी महसूस किए गए। यहां तक कि ब्राजील के कुछ हिस्सों में भी लोगों को धरती हिलने का अहसास हुआ। यूएसजीएस ने कहा है कि इन भूकंपों के कारण बड़े पैमाने पर जानमाल के नुकसान की आशंका बनी हुई है।

Venezuela में आया यह जुड़वां भूकंप पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना इस समय सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे संकट के समय में वैश्विक समुदाय का एक साथ आना बेहद जरूरी है, जैसा कि भारत और अमेरिका ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाकर दिखाया है। आने वाले कुछ दिन वेनेजुएला के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। हम यही उम्मीद करते हैं कि राहत कार्य तेजी से पूरे हों और फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।

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