PM Modi Cabinet Meeting : केंद्र सरकार की ओर से 23 और 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का एक बेहद महत्वपूर्ण और दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हो रहे इस उच्चस्तरीय सत्र में सरकार के अब तक के कामकाज की व्यापक समीक्षा की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत@2047’ के राष्ट्रीय विजन को हासिल करने के लिए नए नीतिगत सुधारों की रूपरेखा तय करना है। इस बड़े प्रशासनिक मंथन का सीधा असर देश के 140 करोड़ नागरिकों, युवाओं, किसानों और व्यापार जगत से जुड़े लोगों पर पड़ेगा।
सेवा तीर्थ नई दिल्ली बैठक: 2021 से जारी तैयारी को मिलेगा नया रूप
यह चिंतन शिविर इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2021 से चल रही इस दूरगामी कवायद को अब ठोस प्रशासनिक नीतियों और जमीनी योजनाओं में तब्दील किया जा रहा है। भारत को आजादी के 100वें वर्ष यानी 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शीर्ष अधिकारियों के 10 सेक्टोरल ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज (SGoS) का गठन किया गया था।
इन समूहों ने देश भर के उद्योग जगत, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के साथ लंबा विचार-विमर्श किया है। इस पूरी प्रक्रिया के आधार पर मंत्रिपरिषद के सामने अब तक 8 अलग-अलग प्रस्तुतियां दी जा चुकी हैं। 23 और 24 सितंबर के इस शिविर में कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग द्वारा तैयार किए गए कार्ययोजना पत्रों पर सभी मंत्री विस्तार से अपने सुझाव साझा करेंगे।
विकसित भारत 2047 रोडमैप: ‘ईज ऑफ लिविंग’ और कागजी नियमों को कम करने पर जोर
इस चिंतन शिविर का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु आम जनता के दैनिक जीवन को आसान बनाना यानी ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि नागरिकों और कारोबारियों को गैर-जरूरी कागजी औपचारिकताओं से राहत दिए बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
शिविर के दौरान जिन मुख्य प्राथमिकताओं पर रणनीति बनाई जा रही है, वे इस प्रकार हैं:
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नियमों और अनुपालनों में कटौती: आम नागरिकों और छोटे उद्यमियों के लिए पुराने पड़ चुके जटिल कानूनों और गैर-जरूरी स्वीकृतियों को खत्म किया जाएगा।
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सेवाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण: स्वास्थ्य, राशन, बिजली और पहचान पत्र जैसी बुनियादी नागरिक सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाया जाएगा।
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अंतर-मंत्रालयी तालमेल: अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच अटकी फाइलों को जल्द निपटाने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर समन्वय का सहारा लिया जाएगा।
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समयबद्ध क्रियान्वयन: सभी सरकारी योजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए कड़े निगरानी तंत्र विकसित किए जाएंगे।



