Chhattisgarh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों के जवानों के बीच पहुंचकर दीपावली का पावन त्योहार मनाया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षाकर्मियों के अद्वितीय साहस की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र से नक्सलवाद का सफाया होने के बाद यह पहली दिवाली मनाई जा रही है। जवानों के अथक परिश्रम, बलिदान और अटूट निष्ठा को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि इन्हीं के पराक्रम से इस क्षेत्र को नक्सली आतंक से पूरी तरह मुक्ति मिली है।
ऐतिहासिक घोषणा और राजनीतिक इच्छाशक्ति
बस्तर में जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने वर्ष 2026 की इस दीपावली को अभूतपूर्व करार दिया और देश को यह संदेश दिया कि राष्ट्र ने दशकों पुराने माओवादी आतंक के खिलाफ निर्णायक विजय प्राप्त कर ली है। वर्तमान में देश का हर जिला नक्सल मुक्त हो चुका है। पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि पहले नक्सल समस्या को लाइलाज मानकर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया था, लेकिन वर्ष 2014 के बाद दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के दम पर पूरी तस्वीर बदल दी गई।
आतंक का पुराना दौर और अतीत की चुनौतियां
माओवादियों के खिलाफ इस कठिन संघर्ष को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि यह लड़ाई काफी चुनौतीपूर्ण थी। नक्सलियों ने अपनी दहशत के बल पर आम नागरिकों से मतदान का अधिकार तक छीन लिया था। एक समय ऐसा था जब देश में एक साल के भीतर नक्सली हमलों की संख्या 2 हजार तक पहुंच जाती थी। उन्होंने वर्ष 2010 की दर्दनाक घटनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिनमें दंतेवाड़ा में मुठभेड़ के दौरान 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे और एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी।
जीरो कैजुअल्टी की उपलब्धि
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि देश को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए मजबूत इरादों और सटीक रणनीति की आवश्यकता थी। वर्ष 2014 में ‘प्रधानसेवक’ के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सरकार ने वह राजनीतिक इच्छाशक्ति प्रदर्शित की जिसकी पहले कमी खलती थी। इसी का परिणाम है कि आज करोड़ों देशवासी नक्सलवाद के खौफ को पीछे छोड़ चुके हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च को शीर्ष कमांडरों के खात्मे और बड़े पैमाने पर हुए आत्मसमर्पण के बाद देश को नक्सल मुक्त घोषित किया था। इसके साथ ही, सीआरपीएफ ने लगातार 12 महीनों तक अभियानों के दौरान ‘जीरो कैजुअल्टी’ यानी किसी भी जवान के हताहत न होने की उल्लेखनीय उपलब्धि भी हासिल की है।
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