Muzaffarnagar urea तस्करी: ‘ऑपरेशन किसान प्रहरी’ के तहत बड़ी कामयाबी, 20 हजार किलो यूरिया के साथ 8 तस्कर गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश के Muzaffarnagar से किसानों के हक पर डाका डालने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। 'ऑपरेशन किसान प्रहरी' के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस की जानसठ थाना टीम और एसओजी देहात ने मिलकर एक अंतर्राज्यीय urea तस्कर गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में सरकारी अनुदानित (सब्सिडी वाली) यूरिया बरामद की है। जब्त की गई urea, गाड़ियां और फर्जी बिलों की कुल कीमत लगभग 60 लाख रुपये बताई जा रही है।

कैसे होता था तस्करी का यह खेल?

पुलिस पूछताछ में जो बात सामने आई है, वह हैरान करने वाली है। यह गिरोह भोपा क्षेत्र के तीन खाद डीलरों से सांठगांठ कर किसानों को मिलने वाली सस्ती सब्सिडी वाली यूरिया को ऊंचे दामों पर खरीद लेता था। इसके बाद फर्जी बिल तैयार किए जाते थे और पिकअप व कैंटर गाड़ियों के जरिए इस urea को हरियाणा के यमुनानगर भेजा जाता था। वहां इसे प्लाईवुड फैक्ट्रियों में बहुत महंगे दामों पर बेच दिया जाता था।

दरअसल, फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाले इंडस्ट्रियल ग्रेड यूरिया से ग्लू बनाने की लागत 80 से 100 रुपये प्रति किलो आती है। लेकिन अगर इसकी जगह किसानों वाली सरकारी urea का इस्तेमाल किया जाए, तो यह लागत घटकर सिर्फ 5 से 6 रुपये किलो रह जाती है। इसी भारी मुनाफे के लालच में यह गिरोह पिछले काफी समय से सक्रिय था।

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रात के अंधेरे में रेकी और चेकिंग के दौरान गिरफ्तारी

इस गिरोह को पकड़ने के लिए पुलिस ने 1 जून की रात कवाल पुल के पास चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान एक हुंडई ऑरा कार, एक कैंटर और दो पिकअप गाड़ियों को रोका गया। कार में सवार लोग आगे-आगे चलकर पुलिस की रेकी कर रहे थे ताकि गाड़ियां सुरक्षित निकल सकें।

वाहनों की तलाशी लेने पर HURL, KRIBHCO और RCF मार्का के कुल 454 कट्टे (यानी करीब 20,430 किलोग्राम) यूरिया बरामद हुई। मौके पर बुलाए गए जिला कृषि अधिकारी ने जब गाड़ियों में मिले बिलों की जांच की, तो वे सभी फर्जी पाए गए।

यह भी पढ़ें: Hardoi में Cyber ठगी गिरोह का भंडाफोड़: हरदोई पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगों के नेटवर्क को तोड़ा, बीटेक छात्रों समेत 10 गिरफ्तार

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6 महीने में लाखों किलो यूरिया की कालाबाजारी

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह गिरोह पिछले 6 महीनों में करीब 15.12 लाख किलोग्राम सरकारी यूरिया की कालाबाजारी कर चुका है। पकड़े गए आरोपियों में सहारनपुर, यमुनानगर और मुजफ्फरनगर के लोग शामिल हैं, जिनमें भोपा के तीन खाद विक्रेता भी हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजय कुमार वर्मा ने इस शानदार कामयाबी के लिए पुलिस टीम को 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। आरोपियों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम और बीएनएस (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

किसानों के हिस्से की खाद को फैक्ट्रियों में ब्लैक करना एक गंभीर अपराध है। मुजफ्फरनगर पुलिस की इस मुस्तैदी से न सिर्फ एक बड़ा घोटाला रुका है, बल्कि स्थानीय किसानों को भी राहत मिलेगी।

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