Muzaffarnagar Double Murder Case: मुजफ्फरनगर दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला, दोषी रईस को फांसी की सजा

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Muzaffarnagar Double Murder Case: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने करीब 15 साल पुराने एक बेहद चर्चित और झकझोर देने वाले दोहरे हत्याकांड में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 ने इस मामले की गहन सुनवाई करने के बाद आरोपी रईस उर्फ जहूर हसन को दोनों हत्याओं का दोषी पाते हुए फांसी (मृत्युदंड) की सजा मुकर्रर की है। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम और अपराध की क्रूरता को “रेयर ऑफ द रेयरेस्ट” यानी दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का मानते हुए दोषी पर 5 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है। इस अदालती फैसले को लंबे समय से न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ित परिवार के लिए एक बहुत बड़ी न्यायिक राहत और इंसाफ के रूप में देखा जा रहा है।

बकरीद के दिन प्रेम प्रसंग में वारदात को दिया था अंजाम

यह पूरा खौफनाक मामला 7 नवंबर 2011 का है, जिस दिन देश भर में बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा था। पुलिस और अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी रईस का एक महिला के साथ प्रेम प्रसंग का विवाद चल रहा था। इसी रंजिश और विवाद के चलते रईस ने पहले राजेश देवी नामक महिला की ईंट से बुरी तरह कुचलकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात के दौरान महिला का महज 6 वर्षीय मासूम बेटा हिमांशु वहां मौजूद था और वह इस पूरी घटना का चश्मदीद गवाह बन गया था। खुद को फंसता देख और अपनी पहचान छुपाने के उद्देश्य से बेरहम कातिल रईस ने उस 6 साल के अबोध बच्चे हिमांशु का भी गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया था।

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9 गवाहों की गवाही और साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध

इस दोहरे कत्लेआम के बाद इलाके में भारी सनसनी फैल गई थी और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अदालत में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूती से कोर्ट के सामने रखा। सरकारी वकील और अभियोजन की टीम ने कड़ी वैज्ञानिक तफ्तीश, साक्ष्यों और कुल नौ महत्वपूर्ण गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया। इन गवाहों के बयानों और पुख्ता सबूतों के आधार पर आरोपी रईस का यह जघन्य अपराध पूरी तरह से सिद्ध हो गया।

न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सुनाया मृत्युदंड का आदेश

लगभग डेढ़ दशक तक चली इस लंबी और जटिल कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के माननीय न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। उन्होंने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद आरोपी रईस को दोषी करार दिया। जज ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एक महिला और उसके मासूम बच्चे की इस तरह निर्मम हत्या करना समाज के खिलाफ एक अक्षम्य अपराध है, इसलिए दोषी को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है और उसे फांसी के फंदे पर लटकाया जाए।

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