Lucknow News : लखनऊ में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने एक कथित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए हाथी दांत से बनी 54 कलाकृतियां जब्त की हैं। इस मामले में चार लोगों को पकड़ा गया है। बरामद सामान में जानवरों और इंसानों की मूर्तियों के अलावा रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें भी शामिल हैं।
अभियान में क्या बरामद हुआ?
डीआरआई ने लखनऊ में अभियान चलाकर कथित तौर पर वन्यजीव तस्करी से जुड़े चार लोगों को पकड़ा। तलाशी के दौरान हाथी दांत से बनी 54 कलाकृतियां मिलीं। इनमें बैल, हाथी और कुत्ते की मूर्तियां शामिल हैं। इसके अलावा एक योद्धा और बच्चे को गोद में लिए मां की मानव आकृति भी बरामद हुई। अधिकारियों के मुताबिक, इन वस्तुओं पर बेहद बारीकी से नक्काशी की गई थी और इनमें शानदार कारीगरी दिखाई देती है। कलाकृतियों के अलावा कैंची, कंघी, अगरबत्ती स्टैंड और सिंदूर दानी जैसी चीजें भी मिली हैं। इन वस्तुओं की कारीगरी को देखते हुए इनकी बाजार में अच्छी कीमत होने की आशंका जताई गई है।
चार लोगों पर कार्रवाई
डीआरआई की कार्रवाई के बाद जब्त हाथीदांत की कलाकृतियों और पकड़े गए चारों कथित आरोपियों को आगे की जांच के लिए उत्तर प्रदेश वन विभाग को सौंप दिया गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि हाथी दांत कहां से आया, इन कलाकृतियों को किसने तैयार किया और इन्हें बेचने या दूसरे स्थानों तक पहुंचाने की योजना क्या थी। इससे कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है।
भारत में हाथी दांत का अवैध व्यापार गंभीर अपराध है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत हाथी दांत और उससे बनी वस्तुओं के व्यापार और वाणिज्य पर कड़े प्रतिबंध हैं। भारत वन्यजीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े नियमों का भी पालन करता है। इसके तहत CITES यानी लुप्तप्राय वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन के प्रावधान भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए हाथी दांत से बनी पुरानी या सजावटी वस्तु को खरीदना-बेचना भी कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है, खासकर जब उसके वैध स्रोत और अनुमति से जुड़े दस्तावेज मौजूद न हों।
पहले भी हुई हैं ऐसी कार्रवाई
यह डीआरआई की वन्यजीव तस्करी के खिलाफ हालिया कार्रवाइयों में से एक है। जुलाई में एजेंसी ने राजस्थान के सुजानगढ़ में करीब 11 किलोग्राम हाथी दांत जब्त किया था। इसी दौरान कोलकाता के हावड़ा में हाथी दांत से बनी देवी-देवताओं की दो मूर्तियां भी बरामद की गई थीं। इससे पहले मई में कर्नाटक के मैसूरु में भी वन्यजीव तस्करी के एक कथित गिरोह पर कार्रवाई हुई थी। वहां करीब 4 किलोग्राम हाथी दांत जब्त किया गया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि एजेंसियां अवैध वन्यजीव व्यापार से जुड़े नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं। हाथियों की सुरक्षा और जैव विविधता को बचाने के लिए ऐसे अवैध कारोबार पर रोक लगाना बेहद जरूरी है।







