उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow एक बार फिर खेल के रंग में रंग गई है। सोमवार को शहर के ऐतिहासिक केडी सिंह बाबू स्टेडियम में तीन दिवसीय ‘सांसद खेल महाकुंभ’ की शुरुआत हुई। इस बड़े खेल आयोजन का उद्घाटन खुद रक्षा मंत्री और स्थानीय सांसद राजनाथ सिंह ने किया। यह प्रतियोगिता 15 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें शहर और आसपास के इलाकों के हजारों युवा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत काफी दिलचस्प रही। उद्घाटन से पहले राजनाथ सिंह और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक एक खुली जीप में सवार होकर मैदान में निकले और खिलाड़ियों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। Lucknow के इस मैदान पर युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था।

9 खेलों में दिखेगा खिलाड़ियों का दम
इस बार खेल महाकुंभ का दायरा काफी बड़ा रखा गया है। 15 अप्रैल तक चलने वाले इस इवेंट में कुल 9 अलग-अलग कैटेगरी में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इनमें एथलेटिक्स, वॉलीबॉल, कबड्डी, बास्केटबॉल, फुटबॉल, हॉकी, बॉक्सिंग, ताइक्वांडो और कलारिपयट्टू जैसे खेल शामिल हैं।
उद्घाटन के दौरान बच्चों ने जब मार्शल आर्ट्स ‘कलारिपयट्टू’ के जरिए अपने युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया और हवा में तलवारें भांजी, तो राजनाथ सिंह खुद को तालियां बजाने से नहीं रोक पाए। उन्होंने खिलाड़ियों के अनुशासन और मेहनत की जमकर तारीफ की। Lucknow के स्थानीय विधायक और मेयर भी इस मौके पर मौजूद रहे।

खेलों के प्रति बदल रहा है देश का नजरिया
मंच से खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति का पैमाना सिर्फ जीडीपी नहीं होती, बल्कि यह भी देखा जाता है कि वहां के एथलीट दुनिया के मंच पर कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि पहले भारत में खेलों को वह स्थान नहीं मिल पाया जो मिलना चाहिए था। लेकिन पिछले 10-12 वर्षों में हालात बदले हैं।
उन्होंने कहा कि पहले हम सिर्फ क्रिकेट और हॉकी के लिए जाने जाते थे और ओलंपिक की मेडल लिस्ट में हमारा नाम मुश्किल से दिखता था। लेकिन अब भारत हर बड़े स्पोर्ट्स इवेंट में अपनी पहचान बना रहा है। Lucknow का नाम अब स्पोर्ट्स कैलेंडर में मजबूती से जुड़ चुका है और यह सांसद खेल प्रतियोगिता अब हर साल आयोजित की जाएगी।

छोटे शहरों और गांवों के खिलाड़ियों को मिल रहा हक
रक्षा मंत्री ने पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि एक समय था जब खेलों को लेकर समाज में उदासीनता थी। खिलाड़ियों के लिए न तो अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर था और न ही उनकी जरूरतों का ध्यान रखा जाता था। खासकर छोटे जनपदों के बच्चों की इच्छाएं सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ देती थीं।
राजनाथ सिंह ने बताया कि अब मोदी सरकार खेलो इंडिया के तहत करीब 5000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। देश भर में 1000 खेलो इंडिया सेंटर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी प्रशंसा की और कहा कि यूपी सरकार भी खेलों पर हजारों करोड़ खर्च कर रही है। राजनाथ सिंह की इच्छा है कि Lucknow में हर खेल के लिए वर्ल्ड क्लास सुविधाएं तैयार हों ताकि यहाँ के बच्चों को बाहर न जाना पड़े।
![]()
स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने रक्षा मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि Lucknow में इस तरह के आयोजन से युवाओं को एक नई दिशा मिलती है। खेलों से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक मजबूती भी आती है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में भी उच्च पदों पर तैनात कर उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है।
पारंपरिक खेलों को मिल रही नई पहचान
सांसद खेल महाकुंभ के जरिए मलखम और योगासन जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार इसके लिए स्कॉलरशिप भी दे रही है। राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों से कहा कि आप सभी की जिम्मेदारी है कि भारत को हर क्षेत्र में चैंपियन बनाएं। उन्होंने बड़े ही स्नेह के साथ युवाओं को संदेश दिया— “आप खेलते रहिए और सदा खिलते रहिए।”
Lucknow के इस स्टेडियम में उमड़ी भीड़ और खिलाड़ियों की तैयारी को देखकर लगता है कि आने वाले समय में यहाँ से कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सितारे निकलेंगे।
Lucknow में आयोजित यह 3 दिवसीय खेल महाकुंभ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उन हजारों सपनों की उड़ान है जो अभावों के बावजूद कुछ बड़ा करना चाहते हैं। जब देश के बड़े नेता सीधे मैदान पर उतरकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हैं, तो युवाओं का आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है। उम्मीद है कि 15 अप्रैल को जब इस महाकुंभ का समापन होगा, तब तक Lucknow को कई नए चैंपियन मिल चुके होंगे। यह आयोजन खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम है।
यह भी पढ़ें: Amarnath Yatra 2026: 3 जुलाई से शुरू होगी बाबा बर्फानी की यात्रा, जानें रजिस्ट्रेशन का पूरा तरीका