Kanpur से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न सिर्फ शहर को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक पिता जिसे अपनी बेटियों की सुरक्षा का ढाल होना चाहिए था, वही उनका काल बन गया। किदवई नगर इलाके में रहने वाले शशि रंजन मिश्रा ने अपनी 11 साल की जुड़वां बेटियों, रिद्धी और सिद्धी की बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना इतनी दर्दनाक है कि इसके बारे में सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए। समाज में रिश्तों के कत्ल की यह दास्तां कई सवाल खड़े करती है कि आखिर एक इंसान इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता है?
Kanpur हत्याकांड: क्या था पूरा मामला?
रविवार की वह सुबह कानपुर के त्रिमूर्ति अपार्टमेंट के लिए किसी काली रात से कम नहीं थी। 45 साल का शशि रंजन मिश्रा, जो पेशे से दवा सप्लाई का काम करता था, उसने अपनी ही बेटियों के खून से अपने हाथ रंग लिए। पुलिस के मुताबिक, वारदात सुबह तड़के अंजाम दी गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हत्या करने के बाद आरोपी पिता कहीं भागा नहीं, बल्कि अपनी बेटियों की लाशों के पास ही बैठा रहा। उसने खुद 4:30 बजे पुलिस को फोन किया और बड़े ही ठंडे दिमाग से कहा कि उसने अपनी बच्चियों को मार डाला है।
जब पुलिस मौके पर पहुंची तो घर का दरवाजा शशि की पत्नी रेशमा ने खोला। रेशमा को उस वक्त तक इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके बगल के कमरे में उसकी दुनिया उजड़ चुकी है। जैसे ही पुलिस और रेशमा कमरे के अंदर दाखिल हुए, वहां का मंजर देखकर सबकी रूह कांप गई। बिस्तर पर खून से लथपथ रिद्धी और सिद्धी के शव पड़े थे। कानपुर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया।
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हत्या की साजिश और खौफनाक अंजाम
शशि रंजन ने पुलिस पूछताछ में जो बातें बताईं, वो किसी सामान्य व्यक्ति की समझ से परे हैं। उसने कुबूल किया कि उसने इस हत्याकांड की योजना 18 अप्रैल को ही बना ली थी। उसका कहना था कि वह अपनी बेटियों से बहुत प्यार करता था और उसे डर था कि उसके मरने के बाद उसकी बेटियों का क्या होगा? वह इस बात को लेकर मानसिक रूप से परेशान रहता था कि उसके बिना उसकी बेटियां इस दुनिया में कैसे सर्वाइव करेंगी। इसी सनक में उसने पहले खुदकुशी करने और बेटियों को साथ ले जाने का मन बनाया।
वारदात वाली रात उसने खाने में नींद की गोलियां मिला दीं ताकि बच्चियां अचेत हो जाएं। जब रिद्धी और सिद्धी गहरी नींद में सो गईं, तो उसने पहले उनका गला घोंटने की कोशिश की और फिर चापड़ से उनकी गर्दन रेत दी। आरोपी ने बताया कि वह खुद भी जान देना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा सका। इस बेरहमी ने यह साफ कर दिया कि वह किसी गहरे मानसिक विकार या सनक का शिकार था।
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परिवार ने फेरा मुंह: कोई नहीं आया साथ
इस पूरे मामले में एक और दुखद पहलू यह सामने आया कि शशि रंजन के अपने परिवार ने उससे पूरी तरह नाता तोड़ लिया है। कानपुर पुलिस ने जब उसके पिता शेखर मिश्रा, भाई राजीव और बहन को फोन कर इस घटना की जानकारी दी, तो उन्होंने साफ कह दिया कि उनका शशि से कोई लेना-देना नहीं है। परिवार वालों का तर्क था कि शशि ने 2014 में उनकी मर्जी के खिलाफ जाकर रेशमा से लव मैरिज की थी, तभी से उनके रिश्ते खत्म हो गए थे।
हद तो तब हो गई जब पुलिस के दोबारा फोन करने पर उन्होंने बात तक नहीं की। पीड़ित मां रेशमा ने जब रोते हुए अपने ससुराल वालों को फोन किया, तो उसे सांत्वना देने के बजाय फटकार लगाकर फोन काट दिया गया। इस दुख की घड़ी में रेशमा बिल्कुल अकेली पड़ गई थी। न कोई कंधा देने वाला था और न ही कोई आंसू पोंछने वाला।
रिद्धी-सिद्धी: एक साथ आईं और एक साथ गईं
पड़ोसियों का कहना है कि रिद्धी और सिद्धी बिल्कुल एक जैसी दिखती थीं और हमेशा एक ही रंग के कपड़े पहनती थीं। दोनों की पसंद-नापसंद भी एक जैसी थी। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि दोनों बच्चियां बहुत प्यारी थीं और हमेशा साथ खेलती थीं। जब पुलिस उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जा रही थी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। लोग यही कह रहे थे कि जो बेटियां इस दुनिया में एक साथ आईं, उन्हें विदा भी एक साथ ही होना पड़ा। कानपुर के उस अपार्टमेंट में आज भी सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई इस नृशंस हत्या से डरा हुआ है।
मां का दर्द और अंतिम विदाई
रेशमा की हालत देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की भी आंखें भर आईं। पोस्टमार्टम हाउस से लेकर कब्रिस्तान तक, रेशमा कई बार बेहोश होकर गिरी। उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था, सिवाय कुछ महिला पुलिसकर्मियों के जिन्होंने उसे संभाला। रेशमा अपनी बेटियों के शवों से लिपटकर बस यही कह रही थी कि उसके पति को फांसी दी जाए, तभी उसे शांति मिलेगी।
बेटियों का अंतिम संस्कार हिंदू कब्रिस्तान में किया गया। इस दौरान शशि की बुआ वाराणसी से अपनी बेटी के साथ वहां पहुंचीं, लेकिन जेल में बंद शशि ने उन्हें पहचानने तक से मना कर दिया। हालांकि, रेशमा ने उन्हें पहचान लिया और वे अंतिम संस्कार में शामिल हुईं। अंतिम विदाई के वक्त का वह मंजर बहुत ही हृदयविदारक था।
कानपुर पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो खुलासे हुए, वे और भी ज्यादा भयावह थे। तीन डॉक्टरों के पैनल ने बच्चियों का पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों बच्चियों की श्वासनली पूरी तरह कटी हुई थी और गर्दन पर 3 से 4 इंच गहरे घाव थे। डॉक्टर ने बताया कि हमला इतना जोरदार था कि बचने की कोई गुंजाइश ही नहीं थी। शरीर से अत्यधिक खून बह जाने के कारण उनकी मौत हुई। पुलिस ने खाने के सैंपल और बिसरा सुरक्षित रख लिया है ताकि यह पुष्टि हो सके कि उन्हें कौन सी नशीली दवा दी गई थी।
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शक का वह जाल जिसने घर तबाह कर दिया
रेशमा ने पुलिस को बताया कि उनके पति शशि रंजन का स्वभाव शुरू से ही शक करने वाला और झगड़ालू था। शादी के कुछ साल बाद से ही वह शराब पीने लगा था और छोटी-छोटी बातों पर मारपीट करता था। उसने घर के हर कोने में, यहाँ तक कि बेडरूम और किचन तक में सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे थे ताकि वह रेशमा पर नजर रख सके। वह रेशमा को बेटियों के पास तक नहीं जाने देता था और उन्हें अपने ही नियंत्रण में रखता था। शक की इसी बीमारी और सनक ने आखिरकार दो मासूमों की जान ले ली और एक हंसते-खेलते परिवार को खत्म कर दिया।
Kanpur की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों को कितनी गंभीरता से लेने की जरूरत है। एक पिता का अपनी बेटियों का हत्यारा बन जाना रिश्तों के खत्म होने की पराकाष्ठा है। आज रेशमा अकेली अपने बेटे के साथ उस घर में है, जहां कभी उसकी बेटियों की हंसी गूंजती थी। न्याय की उम्मीद में वह प्रशासन की ओर देख रही है। उम्मीद है कि कानून इस मामले में कड़ी से कड़ी सजा देगा ताकि फिर कभी कोई पिता ऐसा कदम उठाने की हिम्मत न कर सके।
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