Kanpur Vivah Movie Style Wedding: प्यार और भरोसे की एक ऐसी कहानी Kanpur से सामने आई है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। आपने अक्सर फिल्मों में देखा होगा कि मुश्किल से मुश्किल दौर में भी लोग अपने प्यार का साथ नहीं छोड़ते। कुछ ऐसा ही असल जिंदगी में कर दिखाया है Kanpur के एक दूल्हे ने। अस्पताल का एक बर्न वार्ड, जहां आमतौर पर दर्द की कराहें गूंजती हैं, वहां शहनाई की गूंज तो नहीं थी, लेकिन अपनों का प्यार और तालियों की गड़गड़ाहट जरूर थी। चलिए जानते हैं कि आखिर अस्पताल के बेड पर यह शादी कैसे संपन्न हुई।

मेहंदी की रस्म के दौरान हुआ बड़ा हादसा
यह पूरी कहानी शुरू होती है जगन्नाथपुर गांव से, जहां जगदीश सिंह के घर में खुशियों का माहौल था। उनकी 23 साल की बेटी गरिमा सिंह उर्फ श्वेता की शादी कानपुर के रहने वाले विकास सिंह से तय हुई थी। तय तारीख के मुताबिक 14 मई को बारात आनी थी। इससे एक दिन पहले, यानी 13 मई की शाम को घर में मेहंदी की रस्म चल रही थी। रिश्तेदार और दोस्त नाच-गा रहे थे कि तभी अचानक खुशियां चीख-पुकार में बदल गईं।
दरअसल, रसोई में गैस सिलेंडर के पाइप से अचानक गैस लीक होने लगी और देखते ही देखते पूरे घर में आग फैल गई। गांव वाले और परिवार के लोग तुरंत आग बुझाने के लिए दौड़े। इसी अफरा-तफरी के बीच चूल्हे पर रखी उबलते तेल की कड़ाही पलट गई और गर्म तेल वहां मौजूद लोगों पर गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में दुल्हन श्वेता समेत परिवार के 12 लोग बुरी तरह झुलस गए। घायलों में दुल्हन के पिता और शादी का वीडियो बना रहा फोटोग्राफर भी शामिल थे।

अस्पताल के वार्ड को ही बना दिया शादी का मंडप
हादसे के बाद गांव में हड़कंप मच गया। तुरंत एंबुलेंस बुलाई गई और सभी घायलों को पहले स्थानीय घाटमपुर सीएचसी ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें Kanpur के उर्सला अस्पताल और फिर वहां से एक प्राइवेट अस्पताल में रेफर कर दिया। जैसे ही इस बात की खबर दूल्हे विकास और उनके घरवालों को मिली, वे बिना वक्त गंवाए सीधे अस्पताल पहुंच गए।
दुल्हन की हालत देखकर दोनों पक्षों के कुछ लोगों ने सलाह दी कि फिलहाल शादी को टाल देना चाहिए और पहले गरिमा के ठीक होने का इंतजार करना चाहिए। लेकिन दूल्हे विकास का फैसला कुछ और ही था। उन्होंने शादी टालने से साफ मना कर दिया। विकास ने कहा कि वे गरिमा को इस हालत में अकेला नहीं छोड़ सकते। उन्होंने लड़की के माता-पिता और अस्पताल प्रशासन से बात की और वहीं पर शादी की रस्में पूरी करने की इजाजत मांगी।
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हर हाल में साथ निभाने का वादा
अस्पताल प्रशासन से हरी झंडी मिलने के बाद जो हुआ, उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ और दोनों परिवारों ने मिलकर बर्न वार्ड को ही फूलों और मालाओं से सजाकर एक सुंदर सा मंडप तैयार कर दिया। गरिमा को बेड पर ही तकिए के सहारे थोड़ा उठाया गया। इसके बाद विकास और गरिमा ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई।
वार्ड में मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और परिवार के लोगों ने तालियां बजाकर दोनों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद विकास ने गरिमा का हाथ पकड़कर केक कटवाया और फिर उनकी मांग भरकर हमेशा के लिए अपना बना लिया। विकास ने इस मौके पर कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, वे जीवन के हर मोड़ पर एक-दूसरे का हाथ थामे रखेंगे।

डॉक्टरों ने कहा- ठीक होने में लगेगा समय
अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. सुरेंद्र पटेल ने बताया कि उनके पूरे स्टाफ के लिए यह बेहद भावुक पल था। डॉक्टरों की टीम दुल्हन की सेहत पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने बताया कि गरिमा के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और उन्हें पूरी तरह ठीक होकर डिस्चार्ज होने में करीब 8 से 10 दिन का समय लग सकता है।
आज के दौर में जहां छोटे-मोटे विवादों के कारण रिश्ते टूट जाते हैं, वहीं विकास और गरिमा की यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्यार और भरोसा क्या होता है। विकास ने जिस तरह संकट की इस घड़ी में अपनी दुल्हन का हाथ थामा, उसने समाज के सामने एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। पूरा देश इस नए जोड़े को उनकी इस नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दे रहा है।







