कानपुर पीपीएन मार्केट में नकली चांदी से सोना ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

Share This Article

कानपुर के पीपीएन मार्केट में एक शातिर गिरोह ने धनतेरस के मौके पर ज्वैलर्स से 20 किलो नकली चांदी लेकर असली सोना ठगने की वारदात को अंजाम दिया। गिरोह के सदस्य पहले भी कई राज्यों में ज्वैलर्स को निशाना बना चुके हैं। वारदात के दिन गिरोह ने बैजनाथ ज्वैलर्स से लगभग 12.5 किलो नकली चांदी खरीदने का दावा किया और असली चांदी के बदले नकली चांदी थमा दी। इसके बदले वे शोरूम से सोने की चैन और सिक्के लेकर फरार हो गए। जब ज्वैलर्स ने चांदी की जांच कराई, तो उसमें रांगा पाया गया, जिससे ठगी का पता चला।

पीड़ित सर्राफ की तहरीर पर कर्नलगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। डीसीपी सेंट्रल श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि सर्विलांस टीम, क्राइम ब्रांच और 300 कैमरों की मदद से गिरोह का पता लगाया गया और सक्रिय कार्रवाई शुरू की गई।

कैसे करते थे ठगी?

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह रांगा (Lead) पर चांदी की परत चढ़ाकर नकली सिल्ली तैयार करता था। इसके बाद ये लोग फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर ज्वैलर्स के पास असली चांदी बताकर उसे बेचते थे। गिरोह ने धनतेरस जैसे भीड़भाड़ वाले दिनों को ठगी के लिए चुना ताकि शक की गुंजाइश न रहे। इन ठगों ने कानपुर के बैजनाथ ज्वैलर्स को भी इसी तरह निशाना बनाया था। उन्होंने फर्जी आधार कार्ड पर “राहुल अग्रवाल” नाम से ज्वैलर्स को नकली चांदी बेची और बदले में सोने की चैन और सिक्के लेकर फरार हो गए।

धनतेरस पर हुई घटना

पुलिस ने बताया कि गिरोह ने 18 अक्टूबर को धनतेरस के दिन बैजनाथ ज्वैलर्स के शोरूम में लगभग 15 किलो नकली चांदी 22 लाख रुपये में बेची। प्राप्त रकम से सोने खरीदा और ऑटो में बैठकर फरार हो गए। जब शोरूम के मालिक ने चांदी की जांच कराई, तो नकली चांदी का खुलासा हुआ।

शोरूम के मालिक दिलीप अग्रवाल ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दो नवंबर को रिपोर्ट दर्ज की और मामले की जांच शुरू की। खुलासे के लिए कर्नलगंज पुलिस, क्राइम ब्रांच और सर्विलांस टीम को लगाया गया, जिन्होंने आपरेशन त्रिनेत्र के तहत 300 सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपियों का पता लगाया और गिरफ्तारी की।

अंतरराज्यीय गिरोह का नेटवर्क और पूर्व वारदातें

पुलिस के अनुसार यह गिरोह केवल कानपुर तक सीमित नहीं है। इनके सदस्य पहले कोटा, जयपुर, देहरादून, गुना, शिवपुरी, दिल्ली और ग्वालियर में ठगी कर चुके हैं। गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। गिरोह के सदस्य पहले शिकार तलाशते हैं और पूरी योजना बनाकर वारदात को अंजाम देते हैं। जांच में यह भी पता चला कि मोहित और राजकुमार जीजा-साले हैं, जबकि प्रवीण और मोहित दोस्त हैं। गिरोह के सभी सदस्य सोने और चांदी के कारीगर भी हैं। पुलिस ने बताया कि प्रवीण और मोहित की मुलाकात आगरा में एक शादी समारोह के दौरान हुई थी, जिसके बाद से वे इस ठगी के खेल में शामिल हो गए।

सीसीटीवी और तकनीकी सर्विलांस से खुला राज़

घटना के बाद पुलिस और सर्विलांस टीम ने 300 से अधिक सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स की बारीकी से जांच की। अथक प्रयासों के बाद पुलिस ने गिरोह के 5 सदस्यों — मोहित कुमार वर्मा, नंदू शाक्य, राजकुमार वर्मा, संजय वर्मा उर्फ गुड्डू, और प्रवीण सिंह को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार ये सभी आरोपी कानपुर और आगरा के निवासी हैं। वहीं, गैंग के तीन अन्य सदस्य छत्रपाल सिंह उर्फ सीपी चौहान, देवेंद्र गुमा उर्फ देवा, और आकाश अग्रवाल उर्फ राजा अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारी

पुलिस ने बड़ी मेहनत के बाद गिरोह के पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने 12.5 किलो नकली चांदी, 17.75 ग्राम सोने की चैन, आधारकार्ड, पैनकार्ड और पांच मोबाइल फोन बरामद किए। हालांकि गिरोह का मास्टरमाइंड छत्रपाल सिंह और उसके दो साथी देवेंद्र गुप्ता उर्फ देवा और आकाश अग्रवाल अभी फरार हैं। कर्नलगंज थाना प्रभारी विनीत कुमार ने बताया कि सरगना ने पहले कोटा में भी लगभग 30 लाख रुपये की ठगी की थी। पुलिस अभी तक उनके पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई है।

यह भी पढ़े – बरेली में एमबीबीएस छात्र का अपहरण: दोस्त था मास्टरमाइंड, 50 लाख की फिरौती की मांग

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

Live Channel

Advertisement

[wonderplugin_slider id=1]

Live Poll

[democracy id="2"]

Also Read This