Jharkhand High Court JPSC Verdict: Jharkhand में प्रशासनिक सेवाओं और नौकरियों को लेकर चल रहा घमासान अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। Hemant Soren सरकार को राज्य के उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। झारखंड हाई कोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं के तहत चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करने वाले सरकारी आदेश पर अंतरिम स्टे लगा दिया है। इस अदालती फैसले के बाद उन सैकड़ों युवाओं ने राहत की सांस ली है, जिनकी नौकरियां अधर में लटक गई थीं।
किन्हें मिली राहत और कितनों की बची नौकरी
हाई कोर्ट के इस फैसले से करीब 396 से 398 अभ्यर्थियों का भविष्य फिलहाल सुरक्षित हो गया है। JPSC की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (11वीं से 13वीं) के जरिए कुल 342 पदों पर चयन और नियुक्तियां हुई थीं। इनमें से कई अधिकारी अलग-अलग जिलों में अपनी सेवाएं दे रहे थे, कुछ ट्रेनिंग पूरी कर चुके थे और कई नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे थे।
इसके अलावा, स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा विभाग (विज्ञापन संख्या 18/2023) के तहत 56 पदों पर हुई भर्तियों के 54 से 56 अधिकारियों को भी इस फैसले से सीधी राहत मिली है। इन सभी के काम पर लौटने और पद सुरक्षित रहने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या था पूरा मामला और क्यों कोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी
दरअसल, परीक्षाओं में धांधली के आरोपों के बाद छात्रों का उग्र आंदोलन देखने को मिला था। आंदोलन के दबाव में आकर सोरेन सरकार ने जेपीएससी की इन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार के इस कदम के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन तो समाप्त कर दिया, लेकिन जो अभ्यर्थी पहले से चयनित होकर नौकरी कर रहे थे, उन्होंने सरकार के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे दी।
अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के फैसले पर रोक लगा दी। अब देखना यह होगा कि हाई कोर्ट के इस स्टे के बाद राज्य सरकार और आंदोलनकारी छात्रों का अगला कदम क्या होता है।
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