Jhansi में दलहन मिशन से बदलेगी बुंदेलखंड की खेती

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Jhansi में दलहन मिशन से नई उम्मीद

बुंदेलखंड की धरती लंबे समय से खेती की चुनौतियों से जूझती रही है, लेकिन अब Jhansi से एक नई पहल की शुरुआत हुई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झांसी स्थित रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दलहन मिशन चलाने की घोषणा की। उनका कहना है कि इस क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु दालों की खेती के लिए काफी अनुकूल है, और सही योजना के साथ यहां बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

Jhansi में आयोजित इस कार्यक्रम में 365 विद्यार्थियों को उपाधियां भी प्रदान की गईं। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में नए ब्लॉकों और ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया गया।

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बुंदेलखंड की मिट्टी और दलहन की संभावना

मंत्री ने साफ कहा कि चावल और गेहूं के मामले में भारत आत्मनिर्भर है, लेकिन दालों के लिए अभी भी आयात करना पड़ता है। ऐसे में Jhansi और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में दलहन उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

यहां की जलवायु कम पानी में भी फसल देने वाली दालों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। अगर किसानों को उन्नत बीज, सही मार्गदर्शन और बाजार की सुविधा मिले तो यह क्षेत्र दाल उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है।

सरकार की योजना है कि Jhansi से दलहन क्लस्टर की शुरुआत हो, जहां किसानों को बीज, तकनीकी सहायता और प्रसंस्करण की सुविधा एक साथ मिले।

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शोध से खेत तक पहुंचाने की तैयारी

दीक्षांत समारोह में मंत्री ने कहा कि शोध केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नई किस्मों और खेती की आधुनिक पद्धतियों को तेजी से किसानों तक पहुंचाना जरूरी है।

Jhansi के कृषि विश्वविद्यालय में हो रहे शोध का सीधा फायदा आसपास के किसानों को मिले, इसके लिए विशेष योजना बनाई जा रही है। उन्नत बीजों को कम समय में खेत तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उत्पादन बढ़े और लागत कम हो।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को दुनिया का “फूड बास्केट” बनाना है तो गुणवत्ता और पोषण पर भी ध्यान देना होगा। केवल अधिक उत्पादन ही नहीं, बल्कि पोषणयुक्त फसल भी जरूरी है।

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किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बुंदेलखंड की जलवायु और मिट्टी दलहन की फसल के लिए बहुत उपयुक्त है। चावल और गेहूं में तो भारत आत्मनिर्भर हो गया है लेकिन दालें अभी आयात करनी पड़ती हैं। इसके मद्देनजर बुंदेलखंड में दलहन मिशन शुरू किया जाएगा ताकि दालों की पैदावार और बढ़ सके। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। Jhansi में दलहन मिशन के तहत दालों की मिलें भी लगाने की योजना है, ताकि प्रसंस्करण यहीं हो और किसानों को बेहतर दाम मिल सके।

इसके साथ ही एकीकृत खेती मॉडल को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इस मॉडल में छोटी जोत वाले किसान भी फसल, सब्जी, फल, पशुपालन, बकरी पालन और मधुमक्खी पालन को साथ लेकर चल सकते हैं। इससे आमदनी के कई स्रोत बनेंगे। मंत्री ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के लिए नई-नई किस्में और कृषि पद्धतियां ला रहे हैं। बुंदेलखंड में दालों का क्लस्टर बनाएंगे। किसानों को निशुल्क बीज बांटने से लेकर अन्य सहयोग भी करेंगे।

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युवाओं और वैज्ञानिकों की भूमिका

दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि डिग्री लेना अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। Jhansi के इस विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा अगर अपने ज्ञान और कौशल को गांव तक पहुंचाएं तो खेती की तस्वीर बदल सकती है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों और किसानों को देश की खाद्य सुरक्षा का आधार बताया। आज भारत गेहूं निर्यात कर रहा है और चावल उत्पादन में दुनिया में अग्रणी है। अब जरूरत है कि दालों में भी आत्मनिर्भरता हासिल की जाए।

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कुल मिलाकर, Jhansi से शुरू होने वाला दलहन मिशन बुंदेलखंड के लिए अहम कदम माना जा रहा है। अगर योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं और किसानों तक समय पर सहायता पहुंचती है, तो यह क्षेत्र दाल उत्पादन का मजबूत केंद्र बन सकता है। खेती में विविधीकरण, नई तकनीक और प्रसंस्करण सुविधाएं मिलकर किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह पहल जमीन पर कितनी तेजी से उतरती है और बुंदेलखंड के किसानों को कितना फायदा पहुंचाती है।

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