Jauhar University : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। एजेंसी के मुताबिक, अटैच की गई संपत्ति का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इसकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये बताई गई है।
यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई है। यूनिवर्सिटी का संचालन मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है, जिसकी स्थापना आजम खान ने की थी। ED अब यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल हुए धन और संपत्तियों के स्रोत की जांच कर रही है।
जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन को लेकर क्या है मामला?
ED ने रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर जांच शुरू की थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया कि यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा किया गया। जांच में सिंहनखेड़ा गांव की शत्रु संपत्ति से जुड़े भूखंडों का मामला भी सामने आया। आरोप है कि पट्टे से जुड़ी अनुमति रद्द होने के बाद भी जमीन का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के लिए किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
सरकारी ठेकों के पैसे के इस्तेमाल पर सवाल
ED की जांच में आरोप लगाया गया है कि सरकारी कामों के लिए मिले ठेकों की रकम और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। एजेंसी के मुताबिक, एक कंपनी को लोक निर्माण विभाग से करीब 186 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे। कंपनी के प्रबंध निदेशक के कथित बयान के आधार पर एजेंसी ने दावा किया कि ठेकों की रकम का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल हुआ। जांच एजेंसी कुछ कंपनियों और ठेकेदारों की ओर से ट्रस्ट को दिए गए चंदे की भी पड़ताल कर रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।
जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में सरकारी धन से कराए गए निर्माण कार्य भी जांच के दायरे में हैं। ED के अनुसार, विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से करीब 6.60 करोड़ रुपये के काम कराए गए थे। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी परिसर में पंडाल, ओबीसी छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। एजेंसी का आरोप है कि सार्वजनिक धन से तैयार कुछ ढांचों का मालिकाना हक बाद में यूनिवर्सिटी को दे दिया गया। इस मामले में सरकारी आदेशों और धन के इस्तेमाल की जांच की जा रही है।
यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च का हिसाब क्यों बना बड़ा मुद्दा?
ED की कार्रवाई में यूनिवर्सिटी की निर्माण लागत और ट्रस्ट की ओर से घोषित खर्च के बीच अंतर अहम है। आयकर विभाग की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, परिसर की इमारतों की निर्माण लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी। वहीं, ट्रस्ट ने अपने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया था। एजेंसी ने इस अंतर को लेकर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि निर्माण पर खर्च हुई बड़ी रकम के स्रोत का संतोषजनक हिसाब नहीं मिला। इसी जांच के तहत 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच करने की कार्रवाई की गई है।
पहले भी हो चुकी है छापेमारी
इस मामले में ED पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। 19 अगस्त 2026 को एजेंसी ने जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी ली थी। इसके बाद अक्टूबर में आजम खान से रामपुर जेल में पूछताछ की गई और यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च से जुड़े आरोपों को लेकर नई FIR दर्ज हुई। जांच में जमीन, सरकारी ठेकों, निर्माण सामग्री और चंदे से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। इन मामलों में लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है।
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