Nepal floods: संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से हुए भारी नुकसान और जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया है। जिनेवा स्थित मुख्यालय से जारी बयान में संगठन ने कहा कि वह नेपाल और तिब्बत दोनों क्षेत्रों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार मदद करने के लिए पूरी तरह तत्पर है।
नेपाल में बुनियादी सेवाओं और संपर्क मार्गों के ठप होने से मानवीय सहायता की तुरंत आवश्यकता बनी हुई है। आईओएम सरकारी तंत्र और मानवीय साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि प्रभावितों तक प्राथमिक सहायता पहुंचाई जा सके।
Nepal बाढ़ में मृतकों की संख्या
Nepal के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इस त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 626 तक पहुंच गई है, जबकि लगभग 2,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ और भूस्खलन ने कई जिलों में सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को पूरी तरह से तबाह कर दिया है।
विनाश के इस दौर में दुनिया के कई देशों और संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने नेपाल का हाथ थामा है। आईओएम पहले भी आपदाओं के समय अस्थायी आश्रय, स्वास्थ्य सेवाएं, डेटा प्रबंधन और आजीविका पुनर्निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग देता रहा है।
राहत और पुनर्वास कार्यों में मदद
पड़ोसी देश होने के नाते भारत भी इस मुश्किल समय में नेपाल की लगातार सहायता कर रहा है। भारत की ओर से अब तक कुल 57.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है।
हाल ही में 10 टन राहत सामग्री की एक नई खेप काठमांडू पहुंची है। इसके अलावा, घायलों के बेहतर इलाज के लिए भारत ने 11 सदस्यीय डॉक्टरों और पैरामेडिक्स की विशेष मेडिकल टीम भी नेपाल रवाना की है। प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और पुनर्वास कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।
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