भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: श्रीलंका में रणनीतिक बढ़त

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भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करते हुए श्रीलंका के साथ बड़े आर्थिक और कूटनीतिक समझौते किए हैं। इसी क्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर कोलंबो पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। यह किसी भारतीय उपराष्ट्रपति की श्रीलंका की पहली द्विपक्षीय यात्रा है, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका और प्रधानमंत्री डॉ. हरिणी अमरासूरिया सहित कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे। वे भारत सरकार द्वारा संचालित भारतीय आवास परियोजना के तीसरे चरण के तहत बने घरों को तमिल समुदाय के लाभार्थियों को वर्चुअल माध्यम से सौंपेंगे। इस पहल के साथ श्रीलंका में भारत की सहायता से बने आवासों की संख्या 50,000 तक पहुंच जाएगी, जबकि चौथे चरण में 10,000 और घरों का निर्माण जारी है।

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उपराष्ट्रपति नुवारा एलिया का भी दौरा करेंगे और वहां स्थानीय तमिल समुदाय से संवाद करेंगे। वे भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर देंगे। इस दौरे के साथ ही भारत ने एक बड़ा रणनीतिक आर्थिक कदम भी उठाया है, जिसे क्षेत्रीय भू-राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने श्रीलंका के सबसे बड़े शिपयार्ड कोलंबो डॉकयार्ड PLC में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली है। लगभग 26.8 मिलियन डॉलर के इस सौदे से भारत ने हिंद महासागर में अपनी समुद्री उपस्थिति को और मजबूत किया है।

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