PM नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गहरा दुख व्यक्त किया और इसे देश की आधी आबादी के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने लंबे समय से लंबित इस विषय को आगे बढ़ाने का प्रयास किया था, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। पीएम मोदी ने इस अवसर पर देश की माताओं और बहनों से क्षमा भी मांगी।अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारा नहीं बल्कि विकसित भारत की नींव है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य नारी शक्ति को राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था में बराबरी का अवसर देना है, ताकि वे देश की विकास यात्रा में और मजबूत भूमिका निभा सकें।पीएम मोदी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाने के बजाय बाधाएं उत्पन्न की गईं।
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उन्होंने कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने देशहित से ऊपर दलहित को रखा, जिससे महत्वपूर्ण विधेयक आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सहमति और संवाद की प्रक्रिया आवश्यक है और सरकार आगे भी प्रयास जारी रखेगी।प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि 21वीं सदी की भारतीय नारी अब अधिक जागरूक और सशक्त हो चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि महिलाएं अपने अधिकारों और सम्मान के प्रति सजग हैं और आने वाले समय में देश की राजनीति और नीति निर्माण में उनकी भूमिका और अधिक प्रभावशाली होगी।पीएम मोदी ने यह भी कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में महिलाओं के लिए कई योजनाएं और कानून लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने इसे सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहां नारी शक्ति देश की प्रगति की सबसे बड़ी आधारशिला बनेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में महिला सशक्तिकरण का यह अभियान और मजबूत होगा और भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।







