Delhi crime branch ने नकली कैंसर दवा रैकेट का किया भंडाफोड़ | Fake Cancer Drugs | Crime Branch

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Cancer जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों की लाचारी का फायदा उठाकर कुछ लोग किस हद तक जा सकते हैं, इसका एक चिंताजनक मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (Delhi crime branch) ने दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में सक्रिय एक ऐसे अवैध नेटवर्क (Fake Cancer Drugs) का पर्दाफाश किया है, जो बिना इजाजत के विदेशों से लाई गई और फर्जी लेबल लगी जीवनरक्षक दवाओं को बाजार में बेच रहा था। पुलिस की इस तत्परता से कई मरीजों की जिंदगी के साथ होने वाला खिलवाड़ समय रहते रुक गया है।

विदेश से पढ़ाई और फिर अपराध का रास्ता

पुलिस जांच के मुताबिक, इस मामले में फरीदाबाद के रहने वाले 39 साल के डॉक्टर मनीष शर्मा को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी डॉक्टर मूल रूप से मध्य प्रदेश के ग्वालियर का रहने वाला है। उसने साल 2014 में रूस से अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और भारत लौटने के बाद फरीदाबाद में अपना अस्पताल चला रहा था।

जांच में यह बात सामने आई कि एंटी-Cancer दवाओं में मिलने वाले भारी मुनाफे को देखकर डॉक्टर की नीयत खराब हो गई। उसने जल्द से जल्द मोटा पैसा कमाने के चक्कर में अवैध और फर्जी दवाओं की बिक्री शुरू कर दी। वह ऑनलाइन मार्ट और अन्य माध्यमों से संपर्क करने वाले ग्राहकों को ये खतरनाक दवाएं सप्लाई करता था। चिकित्सा जैसे जिम्मेदार पेशे से जुड़े व्यक्ति द्वारा ऐसा कदम उठाना काफी दुखद है।

कैसे चल रहा था अवैध दवाओं का यह पूरा खेल

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं बरामद की हैं। इनमें आईक्लूसिग (ICLUSIG) के 4 पैकेट, ह्यूमन एल्ब्यूमिन सॉल्यूशन (Human Albumin Solution 20%) की 4 शीशियां और डार्जालेक्स (DARZALEX) के 2 बॉक्स शामिल हैं। जांच में पता चला है कि ये दवाएं मुख्य रूप से अमेरिका और जापान की मशहूर कंपनियों के नाम पर तैयार की गई थीं।

इन दवाओं को तुर्किये के रास्ते अवैध तरीके से तस्करी करके भारत लाया जा रहा था। इनमें से कुछ दवाएं तो ऐसी भी थीं जिन्हें भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से बिक्री की मंजूरी तक नहीं मिली थी। आरोपी डॉक्टर असली दवाओं के नाम पर इन्हें जरूरतमंद मरीजों को बहुत ऊंची कीमतों पर बेचता था और अनुचित लाभ उठाता था।

सिंडिकेट पर पुलिस की लगातार कार्रवाई

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का यह कोई पहला कदम नहीं है। बीते हफ्ते भी पुलिस ने कैंसर की नकली दवाओं का धंधा करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया था। उस कार्रवाई में 17 आरोपियों को पकड़ा गया था और उनके कब्जे से करीब 9 करोड़ रुपये की 588 एंटी-कैंसर दवा की शीशियां जब्त की गई थीं।

फिलहाल क्राइम ब्रांच थाने में बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इन दवाओं के मुख्य स्रोत, सप्लाई की पूरी श्रृंखला और इन्हें खरीदने वाले लोगों के बारे में विस्तार से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में कई और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

यह भी पढ़ें: Ladakh में DRDO के स्वदेशी पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण, 22,000 फीट से लगाई छलांग | DRDO India

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