कठिन परिस्थितियों में 22 हजार फीट से छलांग
परीक्षण के दौरान न्योमा-मुध में तापमान करीब माइनस 15 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इतनी कड़ाके की ठंड और हवा के तेज दबाव के बीच टेस्ट जंपर्स ने 22 हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई। जंपर्स ने 20 हजार फीट की ऊंचाई पर पैराशूट को खोला और 13,700 फीट पर सुरक्षित लैंडिंग की।
इस टेस्ट को पूरा करने में विंग कमांडर राहुल झा, मास्टर वारंट ऑफिसर आर. जे. सिंह और मास्टर वारंट ऑफिसर विवेक तिवारी शामिल थे।
आगरा की लैब में तैयार हुआ यह सिस्टम
इस कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम को आगरा स्थित DRDO की ADRDE लैब और DEBEL ने मिलकर तैयार किया है। इस दौरान जंपर्स ने पैराशूट के साथ स्वदेशी पैरा कंप्यूटर, ऑक्सीजन सिस्टम और विशेष जंपसूट का इस्तेमाल किया। इससे पहले अक्टूबर 2025 में 32 हजार फीट की ऊंचाई से भी इसका सफल परीक्षण किया गया था।
सेना की ऑपरेशनल तैयारियों को मिलेगी मजबूती
सीमावर्ती और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सैनिकों की तेजी से तैनाती के लिए यह सिस्टम काफी उपयोगी साबित होगा। माइनस तापमान और अत्यधिक ऊंचाई पर स्वदेशी उपकरणों का सही तरीके से काम करना यह दर्शाता है कि विषम परिस्थितियों में भी भारतीय सेना की तैयारी पूरी तरह मुस्तैद है।
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