Kusha LRSAM missile: भारत ने अपने हवाई रक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (LRSAM) ‘कुशा’ (Kusha) का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया यह टेस्ट पूरी तरह सफल रहा।
इस पहले परीक्षण के दौरान मिसाइल ने तेज गति और ज्यादा ऊंचाई वाले एक इलेक्ट्रॉनिक टारगेट को सटीक तरीके से इंटरसेप्ट किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने इस उपलब्धि पर DRDO की पूरी टीम और देश के वैज्ञानिकों को बधाई दी है।
भारत का अपना ‘देशी S-400’
‘Kusha’ मिसाइल प्रणाली को अक्सर भारत का ‘देशी S-400’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह रूस की प्रसिद्ध S-400 और अमेरिका के पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की तरह ही भारत के पूरे आसमान की सुरक्षा करने में सक्षम है। परीक्षण के दौरान मिसाइल के लॉन्च, मिड-कोर्स गाइडेंस, रडार ट्रैकिंग और टर्मिनल इंटरसेप्शन प्रणाली की बारीकी से जांच की गई, जिसमें इसने सभी मानकों पर खरा प्रदर्शन किया। यह एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के लड़ाकू विमानों, स्टेल्थ जेट, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों को काफी दूर ही नष्ट करने की ताकत रखता है।
तीन अलग-अलग दूरी पर निशाना साधने की क्षमता
Kusha missile system की सबसे खास बात इसकी बहुस्तरीय (Multi-layered) सुरक्षा व्यवस्था है। यह खतरे की दूरी और प्रकार के हिसाब से तीन अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलों को दागने में सक्षम है:
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M-1 इंटरसेप्टर: यह कम से मध्यम दूरी के खतरों के लिए है, जिसकी मारक क्षमता करीब 150 किलोमीटर तक है।
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M-2 इंटरसेप्टर: यह मध्यम से लंबी दूरी यानी लगभग 250 किलोमीटर तक दुश्मन के हथियारों को हवा में ही खत्म कर सकता है।
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M-3 इंटरसेप्टर: यह सबसे लंबी दूरी का इंटरसेप्टर है, जो 350 से 400 किलोमीटर की सीमा में आने वाले किसी भी हवाई खतरे को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखता है।
विदेशी प्रणालियों पर घटेगी निर्भरता
मौजूदा समय में भारतीय वायु सेना के पास आकाश, बराक-8 और रूस से लिया गया S-400 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात है। लेकिन ‘कुशा’ के आने से भारत को विदेशी हथियारों पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह प्रोजेक्ट ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की एक बड़ी मिसाल है। इसमें भारतीय रक्षा उद्योग और निजी क्षेत्र की कई कंपनियों ने मिलकर योगदान दिया है।
चीन और पाकिस्तान सीमाओं पर बनेगा अभेद्य ढाल
चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर बढ़ते हवाई खतरों को देखते हुए यह सिस्टम काफी अहम माना जा रहा है। इसका एडवांस रडार और कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क एक साथ कई दुश्मनों को ट्रैक कर उन पर हमला कर सकता है। आने वाले समय में सभी परीक्षणों को सफलता से पूरा करने के बाद ‘कुशा’ को भारतीय वायु सेना में शामिल किया जाएगा, जो देश के महत्वपूर्ण शहरों, सैन्य ठिकानों और सीमाओं के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरेगा।
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