Indian railways waste management: ट्रेनों और स्टेशनों को स्वच्छ बनाने के लिए रेलवे का बड़ा कदम

Indian railways waste management

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Indian railways waste management: भारतीय रेलवे ने ट्रेनों और रेलवे परिसरों में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक लिखित सवाल का जवाब देते हुए बताया कि रेलवे बोर्ड, जोनल रेलवे और मंडल स्तर पर समर्पित ‘पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन’ (EnHM) विभाग गठित किए गए हैं।

इन विभागों का मुख्य काम रेलवे परिसरों और ट्रेनों में उत्पन्न होने वाले कचरे की निगरानी करना और उसका सही तरीके से प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण और निस्तारण

रेल मंत्री ने जानकारी दी कि स्टेशनों पर सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग इकट्ठा करने के लिए दो रंगों वाले डस्टबिन लगाए गए हैं। वहीं, चलती ट्रेनों में पैदा होने वाले कचरे को सीलबंद बैग में एकत्र कर तय किए गए स्टेशनों पर उतारा जाता है।

इसके बाद स्थानीय नगर निकायों और निकायों के सहयोग से इस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाता है। कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए देशभर में 13 बायोगैस संयंत्र, 171 कम्पोस्ट संयंत्र, 8 मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) और 858 प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनें भी लगाई गई हैं। 

मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों और अदालत के निर्देशों के तहत रेलवे ने सभी स्टेशनों, कॉलोनियों, कार्यशालाओं और अस्पतालों के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है।

इसके साथ ही, रेलवे परिसरों में बड़े कचरा उत्पादकों (Bulk Waste Generators) की पहचान की जा रही है और कचरे के सटीक आकलन के लिए विशेष अध्ययन शुरू किया गया है। प्रत्येक जोन में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो नियमित ऑडिट करेंगे और सफाई व्यवस्था की रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपेंगे।

ट्रेनों की सफाई के लिए ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग और CTS योजना 

लंबी दूरी की 1,450 जोड़ी ट्रेनों में यात्रियों को स्वच्छ माहौल देने के लिए ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग सेवा (OBHS) दी जा रही है। इसमें कर्मचारी यात्रा के दौरान डिब्बों और शौचालयों की सफाई करते हैं।

इसके अलावा, 63 प्रमुख स्टेशनों पर ‘क्लीन ट्रेन स्टेशन’ (CTS) योजना चल रही है, जिससे 2,800 ट्रेनें जुड़ी हुई हैं। इस व्यवस्था के तहत ट्रेन रुकने के समय कम समय में हाई-प्रेशर जेट मशीनों की मदद से शौचालयों की सफाई और कचरा एकत्र किया जाता है।

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