‘धुरंधर’ में दाऊद का ‘खौफ’ खत्म! आदित्य धर ने दिखाया डॉन का दयनीय अंत; फिल्म के बहाने याद आया डोभाल का वो ‘सीक्रेट मिशन’ जो दुबई में हुआ था फेल

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मुंबई/दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने रिलीज होते ही अंडरवर्ल्ड और सिनेमा प्रेमियों के बीच हलचल मचा दी है। यह फिल्म केवल एक्शन और थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह उस ‘मिथक’ को तोड़ती है जो दशकों से दाऊद इब्राहिम के नाम के साथ जुड़ा था। अब तक की फिल्मों में दाऊद को एक सर्वशक्तिमान और रसूखदार ‘डॉन’ के रूप में महिमामंडित किया जाता रहा है, लेकिन ‘धुरंधर’ में आदित्य धर ने उसे एक कमजोर, बीमार और अपनी ही परिस्थितियों से हारते हुए अपराधी के रूप में पेश किया है। फिल्म का यह नया चित्रण दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि अपराध की दुनिया का अंत हमेशा ‘हीरोइज्म’ नहीं, बल्कि ‘गुमनामी और जिल्लत’ होता है।

शक्तिशाली ‘डॉन’ से एक असहाय वृद्ध तक का सफर

फिल्म ‘धुरंधर’ में दाऊद का किरदार किसी आलीशान महल में बैठकर हुकूमत चलाने वाले गैंगस्टर का नहीं है। यहाँ उसे उम्र और वक्त की मार झेलते हुए दिखाया गया है। जिसकी एक आवाज पर कभी मुंबई ठहर जाती थी, वह आज खुद अपनी सांसों और हालातों के लिए संघर्ष कर रहा है। आदित्य धर ने पर्दे पर दाऊद के ‘ग्लैमर’ को पूरी तरह से हटा दिया है। फिल्म दर्शाती है कि कैसे 1993 के गुनहगार का अंत न केवल भयावह होता है, बल्कि अत्यंत दयनीय भी। यह चित्रण दाऊद इब्राहिम के उस वास्तविक जीवन की ओर इशारा करता है, जहां वह कराची की गलियों में छिपकर अपनी मौत का इंतजार कर रहा है।

पाकिस्तान का झूठ और कराची का वो पता

दाऊद इब्राहिम आज भी भारत का ‘मोस्ट वॉन्टेड’ है। 1993 के मुंबई ब्लास्ट का यह मुख्य आरोपी वर्षों से पाकिस्तान के कराची में शरण लिए हुए है। हालांकि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा इस बात को नकारता रहा है, लेकिन खुफिया रिपोर्टों ने बार-बार पुष्टि की है कि कराची में दाऊद के नाम पर कम से कम तीन संपत्तियां हैं। अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद दाऊद का दायरा सिमट गया है, लेकिन वह आज भी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर है।

दुबई का वो होटल और अजीत डोभाल का मास्टर प्लान

फिल्म की चर्चा के साथ ही दाऊद को पकड़ने की उन ऐतिहासिक कोशिशों की यादें ताजा हो गई हैं, जो अब तक फाइलों में दबी थीं। सबसे चर्चित वाकया जुलाई 2005 का है, जब भारत के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (जो उस वक्त IB के निदेशक रह चुके थे) ने दाऊद को खत्म करने का एक फुलप्रूफ प्लान तैयार किया था। मौका था दाऊद की बेटी का निकाह, जो पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे के साथ हुआ था।

दुबई के आलीशान होटल ग्रैंड हयात में रिसेप्शन का आयोजन होना था। भारतीय खुफिया एजेंसियों को पुख्ता खबर थी कि दाऊद अपनी बेटी के लिए वहां जरूर पहुंचेगा। डोभाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम तैयार थी, जो इस ‘इंटरनेशनल टेररिस्ट’ का काम तमाम करने वाली थी।

मुंबई पुलिस की ‘एक गलती’ और हाथ से निकला सुनहरा मौका

तैयारियां पूरी थीं, शूटर तैनात थे, लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने इतिहास बदल दिया। कहा जाता है कि मुंबई पुलिस की एक छोटी सी चूक या आपसी तालमेल की कमी के कारण यह मिशन ऐन वक्त पर एक्सपोज हो गया। जैसे ही भारतीय एजेंसियों की हलचल की खबर लीक हुई, दाऊद को अलर्ट कर दिया गया और वह उस रिसेप्शन में नहीं आया। वह एक ऐसा मौका था जब दाऊद इब्राहिम की कहानी 18 साल पहले ही खत्म हो सकती थी। ‘धुरंधर’ फिल्म इन्ही ऐतिहासिक कड़ियों और दाऊद के गिरते साम्राज्य की कहानी को बेहद संजीदगी से पर्दे पर उतारती है।

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