Delhi Cyber Fraud : आजकल साइबर ठगी के मामले इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि सुनकर हैरानी होती है। कभी नौकरी का झांसा तो कभी किसी और बहाने लोगों को ऑनलाइन ठगा जा रहा है। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने एक ऐसा ही बहुत बड़ा कारनामा किया है, जिसके बारे में जानकर आप भी चौंक जाएंगे। द्वारका जिला पुलिस ने एक बड़े मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है और इस मामले में छह शातिर आरोपियों को दबोचा है। आइए जानते हैं कि यह पूरा खेल कैसे चल रहा था और पुलिस ने इस गिरोह तक कैसे पहुंच बनाई।
कैसे खुला इस बड़े फर्जीवाड़े का राज
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पुलिस को साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर मिली शिकायतों की जांच के दौरान एक संदिग्ध बैंक खाते का पता चला। द्वारका सेक्टर-23ए स्थित यस बैंक के इस खाते में तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों से ठगी गई रकम आ रही थी। पुलिस ने जब गहराई से तहकीकात की तो पता चला कि यह कोई छोटा-मोट मामला नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ा नेटवर्क है जो अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ है। जांच में सामने आया कि इस पूरे सिंडिकेट से करीब 83.23 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ठगी के तार जुड़े हुए हैं।
नौकरी का झांसा और म्यूल अकाउंट्स का खेल
ये ठग लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए बड़े ही शातिर तरीके अपनाते थे। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई कि आरोपी मासूम और बेरोजगार लोगों को नौकरी का लालच देते थे या फिर उनका वेतन खाता खुलवाने के नाम पर बैंक खाते और फर्जी फर्में बनवा लेते थे। इन म्यूल खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने और फिर उसे आसानी से नकद निकालने के लिए किया जाता था। यस बैंक के अलावा फेडरल बैंक और एसबीआई में भी ऐसे कई फर्जी खाते खोले गए थे। इस पूरे गिरोह का मुख्य हैंडलर चेतन सहरावत था, जो बाकी सभी आरोपियों को निर्देश दिया करता था।
विदेश भागने की कोशिश और एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी
जब पुलिस की सुई इस गिरोह की तरफ घूमी, तो मुख्य आरोपी चेतन सहरावत देश छोड़कर पहले थाइलैंड और फिर दुबई भाग गया। लेकिन कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, पुलिस ने उसके खिलाफ तुरंत लुक आउट सर्कुलर यानी एलओसी जारी करवा दिया। जैसे ही वह पकड़ा जाने की स्थिति में आया, उसे आईजीआई एयरपोर्ट पर धर दबोचा गया। इसी तरह एक अन्य आरोपी तरुण भी दुबई भागने की फिराक में था, लेकिन एलओसी जारी होने की वजह से उसे मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया और गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने इनके ठिकानों पर छापेमारी करके 12 मोबाइल फोन और 109 चेकबुक जैसी कई आपत्तिजनक चीजें भी बरामद की हैं।
यूएसडीटी और बाइनेंस का कनेक्शन
इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। मुख्य आरोपी चेतन सहरावत ने पूछताछ के दौरान यह माना है कि वह यूएसडीटी और बाइनेंस जैसे क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी पैसों के लेनदेन में शामिल रहा है। हालांकि उसने अपना मोबाइल फोन जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराया है, लेकिन पुलिस डिजिटल और क्रिप्टो ट्रेल्स के जरिए यह पता लगाने की पूरी कोशिश कर रही है कि ठगी का यह पैसा असल में कहां-कहां और किसके पास गया है। पुलिस ने इस मामले में 1.14 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम को पहले ही होल्ड करवा दिया है।







