उत्तर प्रदेश की राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री Yogi Adityanath और केंद्रीय मंत्री Annapurna Devi ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं को उनका सम्मान और अधिकार दिलाने के पक्ष में नहीं है, जिसके चलते देश की आधी आबादी में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि विपक्ष के पास महिला अपराधों से जुड़े अपने “पापों” से मुक्ति पाने का एक अवसर था, लेकिन उन्होंने इस मौके को गंवा दिया। उन्होंने संसद में हुई बहस को “द्रौपदी चीर हरण” जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि जिस तरह महाभारत में द्रौपदी का अपमान हुआ था, उसी तरह महिला सम्मान से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर विपक्ष ने आचरण किया। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है और देश की जनता इसे देख रही है। सीएम योगी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस कथन का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने देश में चार प्रमुख वर्ग—नारी, युवा, गरीब और किसान—की बात कही थी। योगी ने कहा कि महिला आरक्षण एक प्रगतिशील कदम है, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इसका विरोध करके यह साबित कर दिया कि वे सुधारवादी नीतियों के रास्ते में बाधा बनते हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, आरजेडी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे दलों का नाम लेते हुए कहा कि इनकी नीतियों से आधी आबादी में नाराजगी है। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ दल मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग करते हैं, जबकि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। उन्होंने यह भी कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के दिन विपक्ष ने महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंचाई और उस दिन को “काला दिन” बना दिया। मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि किसी भी राज्य या वर्ग के अधिकारों का हनन न हो। उन्होंने बताया कि सीटों के पुनर्निर्धारण में सभी राज्यों का संतुलन बनाए रखने की योजना बनाई गई है, ताकि महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। 2011 की जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव भी इसी दिशा में एक कदम था। सीएम योगी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर ऐतिहासिक मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने Shah Bano case का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया था। साथ ही, उन्होंने Triple Talaq Law का उल्लेख करते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार ने इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए कानून बनाया, तब भी विपक्ष ने उसका विरोध किया।
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