सावधान! क्या Painkillers बन रहे हैं आपकी किडनी के दुश्मन? जानें सच्चाई

Painkillers

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आज के भागदौड़ भरे जीवन में Painkillers हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं। हल्का सा सिरदर्द हो, बदन दर्द हो या हल्का बुखार, हम तुरंत मेडिकल स्टोर से जाकर दर्द निवारक दवा ले लेते हैं। ये दवाएं तुरंत राहत तो देती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना सोचे-समझे इनका सेवन करना आपकी किडनी के लिए कितना घातक हो सकता है?

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क्यों खतरनाक हैं ज्यादा पेनकिलर्स?

नेशनल किडनी फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, Painkillers का लंबे समय तक या अत्यधिक मात्रा में सेवन किडनी की कार्यक्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। दरअसल, ये दवाएं किडनी में रक्त के प्रवाह (Blood Flow) को कम कर देती हैं और उसके नाजुक ऊतकों (Tissues) को नुकसान पहुँचाती हैं।

किडनी हमारे शरीर का वह फिल्टर है जो खून से गंदगी को बाहर निकालता है। जब हम बार-बार और बिना जरूरत के दवाओं का सेवन करते हैं, तो इस फिल्टर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता घटने लगती है, जिसे ‘एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी’ भी कहा जाता है।

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किन अंगों पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर?

दर्द निवारक दवाओं का असर सिर्फ किडनी पर ही नहीं, बल्कि लीवर और पेट की परत पर भी पड़ता है। लेकिन किडनी का मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि इसके खराब होने के लक्षण बहुत देरी से सामने आते हैं। बुजुर्गों, डायबिटीज के मरीजों और हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों के लिए Painkillers का जोखिम और भी अधिक बढ़ जाता है। यदि आपको पहले से कोई छोटी-मोटी किडनी की समस्या है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

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दवा लेने के दौरान बरतें ये सावधानियां

किडनी को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है कि हम दवाओं के प्रति अपना नजरिया बदलें। यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं:

  • लेबल जरूर पढ़ें: कोई भी दवा लेने से पहले उसके पैकेट पर लिखे निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।

  • पानी का भरपूर सेवन: जब भी आप कोई दवा लें, तो दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी होने पर Painkillers किडनी पर और ज्यादा नकारात्मक असर डालते हैं।

  • कम मात्रा और कम समय: दवाओं का सेवन हमेशा सबसे कम प्रभावी डोज में और कम से कम समय के लिए ही करना चाहिए।

  • मल्टी-ड्रग से बचें: एक साथ कई ऐसी दवाएं न लें जिनमें एक ही तरह के साल्ट्स मौजूद हों। इससे ओवरडोज का खतरा रहता है।

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डॉक्टर से परामर्श कब है जरूरी?

अगर आपको क्रोनिक पेन (लगातार रहने वाला दर्द) की समस्या है और आपको रोज Painkillers लेने की जरूरत पड़ रही है, तो यह समय है डॉक्टर से मिलने का। डॉक्टर खून की जांच (KFT) और यूरिन टेस्ट के जरिए यह पता लगा सकते हैं कि दवाएं आपकी किडनी को नुकसान तो नहीं पहुँचा रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सूजन और दर्द कम करने वाली कुछ खास दवाएं (NSAIDs) किडनी के लिए सबसे ज्यादा रिस्की होती हैं। इसलिए, खुद से डॉक्टर बनने के बजाय पेशेवर सलाह लेना ही समझदारी है।

दर्द से राहत पाना जरूरी है, लेकिन उसकी कीमत अपनी किडनी गवांकर चुकाना बुद्धिमानी नहीं है। Painkillers का इस्तेमाल केवल आपातकालीन स्थिति में ही करें और जितना हो सके प्राकृतिक तरीकों या योग-प्राणायाम से छोटे-मोटे दर्द को ठीक करने की कोशिश करें। याद रखें, एक स्वस्थ जीवनशैली ही बीमारियों का सबसे बड़ा इलाज है।

यह भी पढ़ें: Heat Stroke से कैसे बचें: भीषण गर्मी में खुद को सुरक्षित और सेहतमंद रखने के सबसे आसान और असरदार उपाय

Disclaimer: यह जानकारी विभिन्न शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह के रूप में न लें। किसी भी नए व्यायाम या गतिविधि को शुरू करने से पहले कृपया अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। 

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