Mission Vande Mataram: देश की ‘प्रथम रक्षा पंक्ति’ कहे जाने वाले सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force – BSF) की महिला प्रहरियों ने वैश्विक पटल पर भारत का गौरव आसमान से भी ऊंचा कर दिया है। बल के डायमंड जुबली (हीरक जयंती) स्थापना वर्ष समारोहों के तहत, BSF की पहली सर्व-महिला पर्वतारोहण टीम ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर एक नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया है।
शुक्रवार (22 मई) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने BSF की इस वीर महिला टीम को बधाई देते हुए उनके अदम्य साहस, अद्वितीय देशभक्ति और दृढ़ संकल्प की जमकर सराहना की है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा: ‘नारी शक्ति ने साबित किया BSF का अजेय पराक्रम’
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी भावनाएं साझा कीं:
Nari Shakti proves BSF’s invincible might.
My heartiest congratulations to the all-women mountaineering team of the BSF that scripted golden history by summiting Mt. Everest. Celebrating the Diamond Jubilee of the force, they conquered the world’s highest peak and sang Vande… https://t.co/FnVNzDMeGP
— Amit Shah (@AmitShah) May 22, 2026
Mission Vande Mataram: इन 4 जांबाज बेटियों ने किया कमाल
BSF के आधिकारिक बयान के अनुसार, “Mission Vande Mataram“ के तहत इस एतिहासिक अभियान को अंजाम दिया गया। इस साहसी दल में देश के अलग-अलग राज्यों और दुर्गम हिस्सों से आने वाली 4 महिला कॉन्स्टेबल शामिल थीं, जिन्होंने भारतीय समयानुसार (IST) सुबह ठीक 8:00 बजे एवरेस्ट के शिखर पर कदम रखा:
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कॉन्स्टेबल कौसर फातिमा (लद्दाख)
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कॉन्स्टेबल त्सेरिंग चोरोल (कारगिल)
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कॉन्स्टेबल मुनमुन घोष (पश्चिम बंगाल)
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कॉन्स्टेबल रबेका सिंह (उत्तराखंड)
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जहाँ सांस लेना भी मुश्किल, वहां गूंजा ‘वंदे मातरम’
BSF ने अपनी महिला प्रहरियों के हौसले की सराहना करते हुए कहा कि यह देश के लिए एक गौरवमयी और भावुक कर देने वाला क्षण है। एवरेस्ट का ‘डेथ जोन’ यानी वह ऊंचाई जहाँ ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो जाता है और तेज बर्फीली हवाओं के बीच सीधे खड़े रहना भी एक अभूतपूर्व चुनौती होती है, वहां इन महिला जांबाजों ने अटूट और बुलंद आवाज में ‘वंदे मातरम’ का गान किया। यह अनूठा मील का पत्थर भारत की महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) और राष्ट्रीय गौरव का जीवंत प्रतीक है।
BSF: देश की प्रथम रक्षा पंक्ति (First Line of Defence)
गौरतलब है कि वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से 1 दिसंबर 1965 को सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना की गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाला यह बल वर्तमान में अपने गौरवमयी 60वें वर्ष (डायमंड जुबली) में प्रवेश कर चुका है। ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर महिला प्रहरियों की यह सफलता बल की उत्कृष्टता और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।







