भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी में किसान मेला आयोजित 2000 से अधिक किसानों ने गोष्ठी में भाग लिया, 30 स्टाल लगे

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भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी में किसान मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह, कुलपति, राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या रहे। उन्होंने सब्जी उत्पादन में संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध और नवाचार कार्यों की सराहना की और कहा कि कृषि के समग्र विकास में सब्जी उत्पादन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कुछ गाँवों को गोद लेकर उन्हें आदर्श सब्जी उत्पादन गाँव बनाया जा सकता है। संस्थान ने पूर्वांचल के 19 एफपीओ के साथ तकनीकी हस्तानरण का अनुबंध किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधाकर पाण्डेय ने कहा कि वैज्ञानिक तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज और मूल्य संवर्धन से किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के 2000 से अधिक किसानों ने भाग लिया और 30 स्टाल लगाए गए।

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में रविवार को आयोजित किसान मेले में आधुनिक और जैविक खेती की झलक देखने को मिली। इस अवसर पर किसानों ने खेती को सुरक्षित, लाभकारी और अगली पीढ़ी तक सौंपने का संकल्प लिया। संस्थान ने सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 50 गांवों को आदर्श गांव बनाने की योजना का भी ऐलान किया।

किसान मेले में अवध विश्वविद्यालय के कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह ने सब्जी उत्पादन में संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध और नवाचार कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सब्जी उत्पादन कृषि के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। साथ ही किसानों से खेती के तरीकों में बदलाव लाने और जल, जमीन एवं जलवायु की शुद्धता बनाए रखने का आह्वान किया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में मसाला, औषधीय और सब्जी फसलों की व्यापक संभावनाएं हैं। वैज्ञानिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कृषि में महिलाओं के योगदान और कृषि GDP में 18% से अधिक हिस्सेदारी का भी जिक्र किया।

डॉ. ए.बी. राय, पूर्व विभागाध्यक्ष, सब्जी फसल सुरक्षा ने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी बताया कि केवल 10-12% कीट और रोग ही फसलों के लिए हानिकारक होते हैं, जबकि 90% से अधिक लाभकारी होते हैं।

पूर्वांचल के 19 FPO के साथ एग्रीमेंट और किसान सम्मान

किसान मेले में पूर्वांचल के 19 एफपीओ के साथ संस्थान द्वारा तकनीकी हस्तांतरण का एग्रीमेंट किया गया। किसानों को नई तकनीक अपनाने और जैविक कृषि की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। उत्कृष्ट सब्जी उत्पादन के लिए अंजू चतुर्वेदी, अवनीश पटेल, राम बुझारत सिंह और रिषभ पटेल को सम्मानित किया गया।

एकीकृत बागवानी विकास मिशन परियोजना के तहत एक्सपोर्ट बढ़ाने वाले किसानों रामरतन सिंह, अरुण सिंह, पप्पू गुप्ता, सर्वजीत सिंह और केदार यादव को इनपुट और तकनीकी सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही केवीके वाराणसी, जौनपुर आदि को सम्मानित किया गया।

किसान मेले में एकीकृत फसल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, संतुलित पोषण, जैविक और प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल तकनीकें, जल संरक्षण आधारित खेती, कीट और रोग नियंत्रण के पर्यावरण-अनुकूल उपाय, जैव-कीटनाशक और समेकित कीट प्रबंधन पर विशेष जानकारी दी गई। किसान-वैज्ञानिक संवाद इस मेले का मुख्य आकर्षण रहा।

वैज्ञानिकों के सुझाव 

कृषि विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ. यू.पी. सिंह और राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो के निदेशक डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीवों के संरक्षण, जैव-उर्वरक और जैव-नियंत्रक, मृदा स्वास्थ्य सुधार और पौध पोषण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर सुझाव दिए।

निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने प्रक्षेत्र और प्रदर्शनी में किसान हितैषी कार्यक्रमों पर चर्चा की। मेले के दौरान आयोजित किसान गोष्ठी में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के 2000 से अधिक किसान शामिल हुए और 30 से अधिक स्टॉल लगे। गोष्ठी में सब्जी उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और कृषि से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी साझा की गई।

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